बिहार की राजधानी पटना के दानापुर थाना क्षेत्र के सगुना मोड़ के पास रहने वाले केंद्र सरकार के एक सेवानिवृत्त शिक्षक को साइबर ठगों ने अपना शिकार बनाया है। अपराधियों ने मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का भय दिखाकर उन्हें लगभग 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा और 30 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित ने इस संबंध में पटना साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी है, जिसके बाद पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

सिम कार्ड और फर्जी मामले से शुरू हुआ जालसाजी का खेल
पीड़ित शिक्षक जवाहर नवोदय विद्यालय से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित अटल आवासीय विद्यालय में संविदा पर कार्यरत हैं। उनके अनुसार, 20 सितंबर को उनके व्हाट्सएप पर एक महिला का कॉल आया था। फोन करने वाली ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर एक मोबाइल नंबर जारी हुआ है और इसी आधार पर उनका वर्तमान मोबाइल नंबर बंद किया जाएगा। इसके बाद उन्हें दिल्ली के बाराखंबा थाने में शिकायत दर्ज होने की बात कही गई और वीडियो कॉल के जरिए पुलिस की वर्दी पहने एक अन्य व्यक्ति से जोड़ा गया।
सीबीआई और अदालत का डर दिखाकर बनाया दबाव
साइबर अपराधियों ने शिक्षक पर दबाव बनाने के लिए दिल्ली के चांदनी चौक स्थित एक बैंक शाखा की फर्जी पासबुक दिखाई, जिसमें उनके नाम और पते का इस्तेमाल कर 6.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग होने का दावा किया गया। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस, सीबीआई अधिकारी और न्यायालय से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने शिक्षक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने की बात कहकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोपियों ने बैंक खातों की सही जानकारी देकर शिक्षक का भरोसा जीत लिया और उन्हें गोपनीय जांच के नाम पर किसी को भी इस बारे में बताने से मना किया।
एफडी तुड़वाकर ट्रांसफर किए पैसे
लगातार मिल रही धमकियों और गिरफ्तारी के डर से घबराकर शिक्षक मुरादाबाद से पटना आए। उन्होंने वरिष्ठ नागरिक के तौर पर जमा अपनी फिक्स डिपॉजिट (एफडी) को तुड़वाया और आरोपितों द्वारा बताए गए बैंक खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने यह राशि 24 घंटे के भीतर लौटाने का झांसा भी दिया था।
सोना गिरवी रखने की मांग पर हुआ संदेह
पैसे भेजने के दो दिन बाद जब ठगों ने शिक्षक से बैंक में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने या उसे गलाकर प्रमाण देने की मांग की, तो उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत अपने भतीजे को पूरी घटना की जानकारी दी। भतीजे के समझाने पर उन्हें साइबर ठगी का अहसास हुआ, जिसके बाद पटना साइबर थाने में मामले की शिकायत दर्ज कराई गई।
