कांग्रेस के लोकसभा सदस्य और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम पर छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन शोषण के गंभीर आरोपों के बाद झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र के प्रमुख विपक्षी दल के खिलाफ पूरे राज्य में व्यापक जन-आंदोलन शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। पार्टी का मानना है कि इस तरह की घटनाओं पर किसी भी प्रकार की ढिलाई या अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती है, इसलिए पूरे प्रदेश स्तर पर इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाएगा।

राज्यभर के सभी जिलों में कांग्रेस कार्यालयों का घेराव
भारतीय जनता पार्टी के राज्य महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने प्रेस को जानकारी देते हुए घोषणा की है कि निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी जिलों में स्थित कांग्रेस कमेटियों के कार्यालयों के सामने महिला मोर्चा की अगुवाई में जोरदार विरोध-प्रदर्शन और धरना दिया जाएगा। भाजपा नेताओं का यह स्पष्ट कहना है कि पार्टी का यह विरोध अभियान तब तक विभिन्न रूपों में लगातार जारी रहेगा, जब तक आरोपी सांसद अपने पद से त्यागपत्र नहीं दे देते।
महिला स्वाभिमान और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही
इस राष्ट्रव्यापी एवं राज्यव्यापी अभियान के माध्यम से भाजपा की महिला मोर्चा की कार्यकर्ता समाज में स्त्रियों के स्वाभिमान, उनकी हिफाजत और सुरक्षा तथा जनप्रतिनिधियों की सामाजिक जिम्मेदारी जैसे अत्यंत गंभीर विषयों को पूरी मजबूती के साथ उठाएंगी। पार्टी का यह प्रयास है कि नारी गरिमा से जुड़े इस अति-संवेदनशील मामले को जन-जन तक पहुंचाया जाए ताकि जनता के बीच इस विषय पर सही संदेश जाए और पीड़ितों को न्याय मिलने की दिशा में दबाव बनाया जा सके।
विपक्षी दल के दोहरे चरित्र और केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल
भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दल के शीर्ष नेतृत्व और उनके दोहरे चरित्र पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। अमर कुमार बाउरी ने विपक्षी पार्टी के रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि एक तरफ तो यह दल सार्वजनिक मंचों से महिलाओं के अधिकारों और उनके संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें और ढोंग रचता है, वहीं दूसरी तरफ स्वयं के सांसद पर लगे इतने संगीन आरोपों के बावजूद उनका शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह मौन साधकर बैठा हुआ है। पार्टी ने मुख्य रूप से यह सवाल उठाया है कि जब उनकी अपनी पार्टी का प्रतिनिधि ऐसी गंभीर घटना में पूरी तरह संलिप्त है, तब पार्टी का केंद्रीय आलाकमान सामने आकर अपना स्पष्ट रुख जाहिर करने से आखिर क्यों कतरा रहा है और इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी जा रही है।
