झारखंड में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने की प्रबल संभावनाएं हैं और राज्य में ऐसी कई जगहें हैं जहां इसके विकास की तलाश की जा सकती है। परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष सह भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ अजीत कुमार मोहंती ने रांची के बीआईटी मेसरा में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संयंत्र के लिए जरूरी भूमि उपलब्धता, जल स्रोत और कम भूकंपीय गतिविधियों जैसे मानक राज्य में मौजूद हैं।

2047 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
देश में बिजली उत्पादन को लेकर भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2047 तक परमाणु ऊर्जा की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 100 गीगावाट करने की योजना पर काम चल रहा है, जबकि वर्तमान में यह क्षमता करीब नौ गीगावाट है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और भाविनी जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी इस दिशा में आगे लाने की योजना है ताकि ऊर्जा जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके।
यूरेनियम की उपलब्धता और झारखंड की भूमिका
परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए कच्चा माल यूरेनियम है, और झारखंड में प्राकृतिक यूरेनियम उपलब्ध है। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड इस दिशा में निरंतर कार्यरत है। राज्य में खनन क्षमता बढ़ने से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में झारखंड की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
युवाओं के लिए नए अवसर और शोध
डॉ मोहंती ने युवाओं और छात्र-छात्राओं को इस क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में नए नवाचार और शोध कर सकते हैं। वर्तमान में विभिन्न प्रकार के रिएक्टरों और अगली पीढ़ी के रिएक्टर विकसित करने पर शोध चल रहा है, जिनमें थोरियम का उपयोग भी किया जा सकेगा। इससे ऊर्जा क्षेत्र में कॅरियर के नए और बेहतर अवसर पैदा हो रहे हैं।
