पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत से रिहा कर दिया है। रिहाई के बाद तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने मीडिया के सामने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया कि उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया गया और उन्हें अवैध रूप से रोका गया।

हिरासत और धरने की पूरी घटना
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख को शनिवार को तब हिरासत में लिया गया था, जब वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ आयोजित एक प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं। जंतर-मंतर से लगभग पांच किलोमीटर पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने टीएमसी के अन्य नेताओं और सांसदों के साथ साउथ एवेन्यू में एक बस स्टॉप पर धरना शुरू कर दिया था।
‘सुपर इमरजेंसी’ जैसे हालात का दावा
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके साथियों को कैदी वाहन में लगभग दो घंटे तक घुमाया गया। उन्होंने देश की राजधानी की मौजूदा स्थिति को आपातकाल से भी बदतर और ‘सुपर इमरजेंसी’ करार दिया। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने या आंदोलन में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जो कि देश और नागरिकों के हित में नहीं है।
सोमवार के मार्च में शामिल होने का ऐलान
रिहाई के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने घोषणा की कि वह आज रात कोलकाता नहीं लौटेंगी। देश के युवाओं के समर्थन और उनके साथ हो रहे बर्ताव के विरोध में वह सोमवार को ‘इंडिया’ गठबंधन के मार्च में शामिल होने के लिए दिल्ली में ही रुकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को उनसे मिलने आना था, लेकिन उन्हें भी बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।
