बिहार के वैशाली जिले की जिलाधिकारी वर्षा सिंह अपनी कार्यशैली और जनसेवा के जज्बे के कारण लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों की निगरानी के लिए उन्होंने रातभर जागकर खटिया पर बैठकर रिंग बांध की मरम्मत का काम पूरा कराया। उनका यह जमीनी अंदाज प्रशासनिक गलियारों में एक मिसाल बन गया है।

कौन हैं आईएएस वर्षा सिंह?
आईएएस वर्षा सिंह मूल रूप से बिहार के खगड़िया जिले की रहने वाली हैं और उनका जन्म वर्ष 1986 में हुआ है। उनकी स्कूली शिक्षा महाराष्ट्र के नागपुर में पूरी हुई है। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और वह 2016 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं। उनके पिता चाहते थे कि वह महाराष्ट्र कैडर चुनें, लेकिन वह अपने गृह राज्य में रहकर जनता के लिए जमीनी स्तर पर काम करना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने बिहार कैडर चुना।
विभिन्न पदों पर दे चुकी हैं सेवाएं
वर्षा सिंह ने अपनी प्रशासनिक सेवा के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं:

- प्रशिक्षण के दौरान उनकी पहली तैनाती गोपालगंज में सदर एसडीओ के रूप में हुई थी।
- इसके बाद उन्होंने अरवल जिले में डीएम की जिम्मेदारी निभाई।
- वैशाली की जिलाधिकारी बनने से पहले वह नगर विकास एवं आवास विभाग में अपर सचिव के पद पर थीं।
- उन्होंने पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में एडिशनल मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में भी कार्य किया है।
जमीनी जुड़ाव और संवेदनशीलता
अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अलावा वर्षा सिंह अपने सरल स्वभाव और जनता से सीधे जुड़ने के लिए जानी जाती हैं। इससे पहले उन्हें खेतों में किसानों और मजदूरों के साथ कीचड़ में उतरकर धान की रोपनी करते हुए भी देखा गया था। हाल ही में वैशाली में हुए एक नाव हादसे के बाद जब वह मौके पर पहुंचीं, तो एक पीड़ित महिला को रोता देख वह खुद भी भावुक हो गईं और उनकी आंखों में भी आंसू आ गए।
