राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने तथा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी की है। वर्ष 2027 से एनटीए की परीक्षाओं के लिए सरकारी संस्थानों में ही परीक्षा केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिसके तहत देश भर में पहले चरण में एक हजार मानक परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। इस पूरी योजना पर एनटीए की ओर से 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी।

सरकारी संस्थानों में बनेंगे हाइटेक परीक्षा केंद्र
इस योजना के तहत बिहार में 32 टेस्ट सेंटर बनाने और कई तकनीकी संस्थानों में परीक्षा केंद्र विकसित करने की तैयारी है। वहीं, झारखंड के 16 जिलों में भी परीक्षा केंद्र बनाए जाने की योजना है। दोनों राज्यों के सरकारी तकनीकी संस्थानों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की कंप्यूटर सुविधाओं का आकलन किया जा रहा है। जिन संस्थानों में पर्याप्त कंप्यूटर, बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, निर्बाध बिजली आपूर्ति और अन्य जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, उन्हें परीक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
बुनियादी ढांचे का विकास और कर्मचारियों का प्रशिक्षण
एनटीए की इस योजना के तहत नए भवन निर्माण के बजाय सरकारी संस्थानों में पहले से मौजूद कंप्यूटर लैब और सुविधाओं को उन्नत करने पर जोर दिया जाएगा। कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के संचालन के लिए सुरक्षित नेटवर्क, विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी सहायता अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही, किसी तकनीकी खराबी या नेटवर्क बाधा से निपटने के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान की जांच और तकनीकी सुरक्षा मानकों के पालन के लिए परीक्षा ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।
छात्रों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
परीक्षा केंद्रों के चयन और विकास की इस पहल का मुख्य उद्देश्य परीक्षा संचालन में पारदर्शिता बढ़ाना और गड़बड़ियों की आशंका को कम करना है। नए केंद्र बनने से विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए अत्यधिक दूर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें अपने आसपास के शहरों में ही परीक्षा केंद्र मिलने की सुविधा होगी। हालांकि, परीक्षा केंद्र का आवंटन अभ्यर्थियों की संख्या, उपलब्ध सीटों और एनटीए के निर्धारित नियमों के आधार पर ही किया जाएगा।
