मशहूर गीतकार संतोष आनंद ने 97 वर्ष की उम्र में दीपावली के पावन अवसर पर देशवासियों को एक खास संदेश भेजा है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका कला के प्रति प्रेम और जज्बा यह साबित करता है कि हुनर कभी उम्र का मोहताज नहीं होता। उनका यह वीडियो देखकर उनके पुराने गीतों की यादें ताजा हो जाती हैं और फैंस भावुक हो रहे हैं।

दिवाली पर संतोष आनंद का खास वीडियो संदेश
दिवाली के मौके पर सामने आए इस वीडियो में संतोष आनंद ने त्योहार के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने भगवान राम के रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटने के प्रसंग को भी याद किया। वीडियो में उनके बात करने का अंदाज और भाव लोगों के दिलों को छू रहे हैं, जिसे देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
हिंदी सिनेमा में संतोष आनंद का ऐतिहासिक सफर
संतोष आनंद का जन्म 5 मार्च 1929 को हुआ था। उन्होंने साल 1970 में आई फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने ‘शोर’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘क्रांति’, ‘प्यासा सावन’ और ‘प्रेम रोग’ जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों के लिए बेहतरीन गीत लिखे। उनके लिखे गीत ‘एक प्यार का नगमा है’, ‘मैं न भूलूंगा’, ‘ये गलियां ये चौबारा’, ‘तेरा साथ है तो’ और ‘मेघा रे मेघा रे’ आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं। इन गीतों को लता मंगेशकर, मुकेश, महेंद्र कपूर और मोहम्मद अजीज जैसे दिग्गज गायकों ने अपनी आवाज दी है।
मिला है फिल्मफेयर और यश भारती सम्मान
अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए संतोष आनंद को दो बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुका है। उन्हें यह सम्मान वर्ष 1975 में फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और वर्ष 1983 में फिल्म ‘प्रेम रोग’ के लिए दिया गया था। इसके अलावा, साल 2016 में उन्हें प्रतिष्ठित ‘यश भारती पुरस्कार’ से भी नवाजा गया था। 97 की उम्र में भी उनका कला से जुड़ा रहना और इस तरह से त्योहार की खुशियां साझा करना उनके लंबे सफर की अमिट छाप छोड़ता है।
