उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित रहे नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा दी है। इस सनसनीखेज मामले में मर्चेंट नेवी के पूर्व कर्मी सौरभ राजपूत की हत्या कर उनके शव के टुकड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपा दिए गए थे। फैसले के वक्त अदालत में दोषियों के भावुक होने की बात सामने आई, जबकि मृतक के परिजनों ने इस न्याय पर संतोष व्यक्त किया।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि और टाइमलाइन
सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया था और उनकी एक बेटी भी थी। सौरभ काम के सिलसिले में लंदन में मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि मुस्कान के साहिल शुक्ला के साथ प्रेम संबंध थे, जो इस खौफनाक वारदात की मुख्य वजह बने। फरवरी 2025 में सौरभ अपने घर मेरठ लौटे थे, जहां परिवार के साथ कुछ दिन बिताने के बाद मार्च 2025 में उनकी हत्या कर दी गई।
सबूत छिपाने का खौफनाक तरीका
जांच में खुलासा हुआ कि सौरभ को बेहोश करने के बाद उन पर चाकू से वार किए गए। इसके बाद उनके शव के टुकड़े करके एक नीले प्लास्टिक ड्रम में डाले गए और उसे सीमेंट तथा रेत से सील कर दिया गया। इस भयानक वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए थे। बाद में घर से दुर्गंध आने और सौरभ के लापता होने की सूचना पर पुलिस ने जांच की और 18 मार्च 2025 को इस भयानक खुलासे के साथ ड्रम से शव के अवशेष बरामद किए।
अजीबोगरीब कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल
पुलिस ने इस मामले में मई 2025 में लगभग 1,000 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत में जुलाई 2025 से ट्रायल शुरू हुआ जो करीब 13 से 16 महीने तक चला। इस दौरान अदालत में कुल 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मुकदमे के दौरान ही नवंबर 2025 में न्यायिक हिरासत में रहते हुए मुस्कान ने एक और बेटी को जन्म दिया था। अंततः सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी मानते हुए मृत्युदंड का आदेश सुनाया।
