बिहार में राजस्व अधिकारियों के मुद्दे पर सरकार के साथ बनी सहमति के बाद आखिरकार आरटीपीएस (RTPS) सेवाएं पूरी तरह बहाल कर दी गई हैं। इस फैसले के बाद राज्यभर में जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने का काम फिर से शुरू हो गया है, जिससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है।

आगामी परीक्षाओं के लिए मिलेगा लाभ
आरंभ हुई इस व्यवस्था से टीआरई-4 और लाइब्रेरियन समेत अन्य कई आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी दस्तावेजों के मिलने का रास्ता साफ हो गया है। अब छात्र और आम लोग बिना किसी रुकावट के अपने जाति, आय, आवासीय प्रमाण पत्र के अलावा नॉन-क्रीमी लेयर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से जुड़े प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे। बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
डोंगल के इस्तेमाल पर बनी सहमति
प्रशासनिक स्तर पर बनी सहमति के तहत गृह विभाग और राजस्व विभाग की ओर से स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी होने तक दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और अन्य संबंधित राजस्व कार्यों में डोंगल का उपयोग फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है। मुजफ्फरपुर के मुशहरी प्रकरण के बाद से अधिकारियों और सरकार के बीच गतिरोध उत्पन्न हुआ था, जिसके समाधान के बाद अब सेवाओं को पटरी पर लाया जा रहा है।
संघ की अन्य मांगें और एसओपी
बिहार राजस्व सेवा संघ का कहना है कि अर्ध-न्यायिक राजस्व कार्यों में कानूनी संरक्षण और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए। संघ ने भूमि विवादों से बचने के लिए दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस के वास्ते एक विस्तृत एसओपी जारी करने की मांग की है, जिसमें अभिलेखों के सत्यापन और स्थल निरीक्षण जैसे अहम पहलू शामिल हों।
