पटना पुलिस द्वारा हाल ही में पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार हत्याकांड में शामिल तीन बदमाशों के एनकाउंटर के बाद विवाद गहरा गया है। इस मुठभेड़ में मारे गए आरोपितों के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया है।

परिजनों और ग्रामीणों के गंभीर आरोप
मारे गए आरोपितों के परिजनों का दावा है कि इस हत्याकांड से उनका कोई लेना-देना नहीं था। मुख्य साजिशकर्ता बताए जा रहे जेपी यादव की पत्नी ने सवाल उठाया कि उनके पति को पंजाब से पटना किसने बुलाया था और पुलिस को इसके बारे में कैसे जानकारी मिली। उनका कहना है कि उनके पति के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं थी। वहीं, जेपी यादव के भाई राम आशीष यादव ने बताया कि घटना से ठीक पहले उनकी अपने भाई से बात हुई थी और वह अपने बीमार ससुर से मिलने जा रहे थे। गांव के लोगों का भी यह आरोप है कि पुलिस ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इस घटना को अंजाम दिया है।
पुलिस का पक्ष और अधिकारियों का बयान
दूसरी ओर, पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मारे गए आरोपितों का आपराधिक इतिहास साझा करते हुए दावा किया है कि बबलू कुमार और सूरज कुमार इस हत्याकांड में शूटर थे, जबकि जेपी यादव मुख्य साजिशकर्ता था। हालांकि परिजनों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। बढ़ते विरोध और परिजनों के सवालों के बाद वरीय पुलिस अधिकारियों ने पूरे मामले की दोबारा जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दानापुर के एएसपी ने भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है।
