बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर इलाके में एक गंभीर नाव हादसे में 13 बच्चों की जान चली गई। गंगा के पानी से बने जलभराव क्षेत्र को पार करते समय यह जर्जर जलयान डूब गया, जिससे इलाके में कोहराम मच गया। इस दुर्घटना में तीन बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा
रामपुर श्यामचंद पंचायत के एक ही टोले के लगभग 25 बच्चे पड़ोसी गांव में श्राद्ध का भोज खाने जा रहे थे। दोनों गांवों के बीच लगभग 300 मीटर चौड़ा पानी से भरा इलाका था जिसे पार करने के लिए बच्चों ने एक नाव का सहारा लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह जलयान पहले सरकारी था और पुराना होने के कारण इसे परित्यक्त घोषित किया जा चुका था। हालांकि, ग्रामीणों ने इसकी मरम्मत करके इसे आवागमन के लिए चालू रखा था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही जलयान किनारे से थोड़ा आगे बढ़ा, वह डगमगाने लगा और उसमें पानी भरने लगा। अधिक वजन और फटे हुए हिस्से से पानी अंदर आने के कारण स्थिति बिगड़ गई और वह गहरे पानी में पलट गया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े और अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ बच्चों को बाहर निकाला।
राहत और बचाव कार्य पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद मौके पर भारी अफरातफरी मच गई। ग्रामीणों का आरोप है कि एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, जिसके चलते लोगों को मजबूरन बच्चों को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा। इस दुर्घटना में एक ही परिवार की सात बच्चियों की भी मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
मुआवजा और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
घटना पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक सहायता अपनी जगह है, लेकिन इस बात की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि परित्यक्त घोषित की जा चुकी नाव का इस्तेमाल दोबारा कैसे शुरू हुआ और इसकी जवाबदेही किसकी है।
