कानपुर की रहने वाली डॉ संजीवनी शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश की है। गंगा किनारे फैली गंदगी को देखकर शुरू हुई उनकी यह पहल आज एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। उनके इसी समर्पण के चलते उन्हें ‘कचरा क्वीन’ के नाम से भी जाना जाता है।

गंगा घाट की गंदगी से हुई शुरुआत
एक दिन सुबह की सैर के दौरान जब डॉ संजीवनी शर्मा अपने छोटे बेटे के साथ गंगा किनारे पहुंचीं, तो वहां चारों तरफ प्लास्टिक और कचरे का ढेर देखकर उनका मन बेचैन हो गया। उन्होंने खुद से सवाल किया कि जब गंदगी हम सब फैलाते हैं, तो इसे साफ करने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी और की क्यों होनी चाहिए। इसी विचार ने उनके मन में शहर को साफ करने की अलख जगाई और उन्होंने अकेले ही इस बदलाव की नींव रखी।
‘कानपुर प्लॉगर्स’ की स्थापना और जनभागीदारी
अकेले सफाई करना संभव न देखकर उन्होंने मार्च 2021 में सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को इस मुहिम से जुड़ने की अपील की। उनकी इस पुकार पर लोग घरों से बाहर निकले और 6 मार्च 2021 को पहला सफाई अभियान चलाया गया। यहीं से ‘कानपुर प्लॉगर्स’ की शुरुआत हुई, जिसमें सुबह की सैर या दौड़ के दौरान रास्ते का कचरा उठाने के काम को जोड़ा गया। धीरे-धीरे इस टीम के साथ 800 से ज्यादा लोग जुड़ गए और यह हर हफ्ते नियमित रूप से सफाई करने लगे।
प्लास्टिक का रीसाइक्लिंग और प्रधानमंत्री द्वारा सराहना
डॉ संजीवनी और उनकी टीम ने केवल कचरा उठाने तक ही सीमित न रहकर उसके दोबारा इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया। उन्होंने घरों और दुकानों से पांच लाख से अधिक सूखे प्लास्टिक के टुकड़े एकत्र किए और उन्हें रीसाइकिल करके साइकिल सीट कवर, पाइप तथा पौधों के गार्ड जैसे उपयोगी उत्पाद बनाए। नवंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 116वें एपिसोड में इस प्रेरणादायक पहल की खुलकर प्रशंसा की थी।
