बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास और रखरखाव को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के 47 महत्वपूर्ण पुलों और 55 स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स वसूलने की योजना तैयार की जा रही है। इस व्यवस्था के तहत 250 मीटर से अधिक लंबे पुलों और चुनिंदा स्टेट हाईवे को चिन्हित किया गया है, जहां मुख्य रूप से व्यावसायिक गाड़ियों से टोल वसूला जाएगा।

राजस्थान मॉडल का अध्ययन कर रहे अधिकारी
कम लागत वाले टोल प्लाजा के निर्माण, रखरखाव और इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन की प्रणाली को समझने के लिए राज्य सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं। इसके तहत बिहार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक टीम ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में राजस्थान का दौरा किया था। इस अध्ययन दौरे में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पथ निर्माण विभाग और बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने वहां की तकनीकी व्यवस्था और कम खर्च में टोल प्लाजा चलाने के मॉडल का जायजा लिया।
इलेक्ट्रॉंनिक टोल कलेक्शन और फास्टैग की व्यवस्था
चयनित किए गए पुलों और स्टेट हाईवे पर आधुनिक टोल प्लाजा बनाए जाने की योजना है। इन प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जिससे फास्टैग के माध्यम से शुल्क की वसूली की जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाना है ताकि आवागमन में किसी प्रकार की बाधा न आए।
कैबिनेट से मिल चुकी है वित्तीय मंजूरी
इस पूरी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राज्य कैबिनेट की बैठक में पहले ही प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। टोल वसूली की व्यवस्था विकसित करने, निगरानी प्रणाली तय करने, शुल्क ढांचा तैयार करने और परामर्श सेवाओं के लिए 30 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की गई है। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए सलाहकारों की सहायता भी ली जा रही है ताकि परियोजनाओं का संचालन प्रभावी ढंग से किया जा सके।
