झारखंड की राजनीति: जब रूपी सोरेन ने लड़ा था एकमात्र लोकसभा चुनाव, बाबूलाल मरांडी से हुआ था कड़ा मुकाबला

झारखंड के राजनीतिक इतिहास में सोरेन परिवार का दुमका क्षेत्र से बहुत गहरा और पुराना नाता रहा है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की धर्मपत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन किस्कू ने अपने जीवनकाल में केवल एक बार चुनावी मैदान में कदम रखा था। वर्ष 1999 के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उन्हें दुमका लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इस चुनाव में उनके सामने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री बाबूलाल मरांडी थे, जिसके कारण यह मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा हो गया था।

झारखंड की राजनीति: जब रूपी सोरेन ने लड़ा था एकमात्र लोकसभा चुनाव, बाबूलाल मरांडी से हुआ था कड़ा मुकाबला

वर्ष 1999 का कड़ा दुमका लोकसभा मुकाबला

दुमका संसदीय क्षेत्र को हमेशा से शिबू सोरेन की राजनीतिक कर्मभूमि माना जाता रहा है। ऐसे में जब पार्टी ने वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में रूपी सोरेन को मैदान में उतारा, तो मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया। दूसरी तरफ, भाजपा ने अपने कद्दावर नेता और केंद्र सरकार में मंत्री बाबूलाल मरांडी पर दांव खेला था। चुनाव के नतीजे आने पर दोनों उम्मीदवारों के बीच वोटों का अंतर बहुत ही कम निकला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि टक्कर कितनी कांटे की थी।

महज 4648 मतों से हार गईं थीं रूपी सोरेन

मतगणना के परिणामों के अनुसार, भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल मरांडी को कुल 2,01,141 वोट मिले थे, जबकि झामुमो की ओर से चुनाव लड़ रहीं रूपी सोरेन किस्कू को 1,96,493 मत प्राप्त हुए थे। दोनों नेताओं के बीच हार-जीत का अंतर केवल 4,648 वोटों का था। अपने एकमात्र चुनावी सफर में रूपी सोरेन भले ही जीत हासिल नहीं कर पाईं, लेकिन उन्होंने भाजपा के दिग्गज और मजबूत उम्मीदवार को कड़ी टक्कर दी थी।

सोरेन परिवार और दुमका का अटूट राजनीतिक रिश्ता

रूपी सोरेन का दुमका से जुड़ाव केवल इस एक चुनाव तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन में भी इस क्षेत्र की बड़ी भूमिका रही है। शिबू सोरेन इस सीट से आठ बार सांसद चुने गए और उनके तीनों बेटों ने भी इस क्षेत्र की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। उनके बड़े बेटे दिवंगत दुर्गा सोरेन, वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और छोटे बेटे बसंत सोरेन सभी ने अलग-अलग समय पर इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है, जिससे सोरेन परिवार की राजनीतिक यात्रा का यह क्षेत्र मुख्य केंद्र बना रहा है।

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