समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई INDIA गठबंधन की रैली के दौरान आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी रणनीति के संकेत दिए हैं। उन्होंने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी, वोट चोरी और अन्य राजनीतिक मुद्दों के जरिए सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला। उनके इस संबोधन से स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि पार्टी आने वाले समय में इन विषयों को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।

रामलीला मैदान को बताया लोकतंत्र की हल्दीघाटी
रैली को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख ने विपक्षी एकजुटता को लोकतंत्र की रक्षा का प्रतीक बताया और रामलीला मैदान को लोकतंत्र की हल्दीघाटी की संज्ञा दी। उन्होंने दावा किया कि बदलाव की यह बयार उत्तर प्रदेश से ही शुरू होगी। उनका कहना था कि जो लोग उत्तर प्रदेश के रास्ते से सत्ता तक पहुंचे हैं, उन्हें राज्य की जनता ही सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। इस सभा के माध्यम से उन्होंने साल 2027 के चुनावों के लिए विपक्षी एकता का संदेश देने का प्रयास किया।
मतदाता सूची और SIR को लेकर उठाए सवाल
कार्यक्रम के दौरान मतदाता सूची से नाम काटे जाने और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के उस बयान का हवाला दिया जिसमें प्रदेश में लाखों हिंदू मतदाताओं के नाम हटने की बात कही गई थी। उन्होंने इस आंकड़े के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। पार्टी के सामने अब इस विषय को केवल भाषणों तक सीमित न रखकर बूथ और गांव स्तर तक पहुंचाने की चुनौती होगी।
एमएलसी चुनाव के परिणामों पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन में उन्होंने हालिया विधान परिषद चुनावों का भी जिक्र किया और काशी में पार्टी के प्रदर्शन का हवाला देते हुए विरोधी दल पर तंज कसा। उन्होंने दोबारा मतगणना और निर्वाचन आयोग से जुड़े मामलों को लेकर भी अपनी बात रखी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पीडीए, मतदाता सूची और अन्य स्थानीय मुद्दों को जनता के बीच ले जाना राजनीतिक दलों के लिए एक अहम रणनीति रहने वाला है।
