रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका ने अपनी नीतियों में परिवर्तन करते हुए संयुक्त राष्ट्र में रूस का साथ दिया है. संयुक्त राष्ट्र में लाए गए प्रस्ताव में यूक्रेन से रूस की सेना की वापसी की मांग की गई थी और लड़ाई की निंदा की गई थी. इस प्रस्ताव पर जब मतदान की जरूरत पड़ी तो अमेरिका ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए रूस के साथ खड़े होने की घोषणा की. गौरतलब है कि यह प्रस्ताव कई यूरोप के देशों की तरफ से लाया गया था. इस मतदान के दौरान भारत ने अपने आप को अलग रखा. 

संयुक्त राष्ट्र में यूरोप के अधिकांश देशों के समर्थन से पेश किए गए इस प्रस्ताव को 93 देशों ने समर्थन दिया, जबकि 18 देशों ने इसके खिलाफ वोट किया, जिसमें अमेरिका, रूस, बेलारूस और उत्तर कोरिया जैसे देश शामिल थे. भारत सहित 65 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

अमेरिकी राजदूत डोरोथी शी ने मतदान के बाद कहा, “यह प्रस्ताव शांति की ओर एक कदम है. हमें अब आगे बढ़कर यूक्रेन, रूस और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक शांतिपूर्ण भविष्य बनाना होगा. हालांकि, यूरोपीय देशों ने अमेरिका के इस रुख की आलोचना की है. ब्रिटेन की राजदूत बारबरा वुडवर्ड ने कहा कि शांति की शर्तें ऐसी होनी चाहिए जो यह संदेश दें कि आक्रामकता का कोई फायदा नहीं होता.

अमेरिका की नीतियों में परिवर्तन के क्या हैं कारण? 
जानकारों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सीधे बातचीत कर युद्ध को खत्म करना चाहते हैं. हाल ही में ट्रंप ने पुतिन के साथ बातचीत की थी. 

रूस को चीन का भी मिल रहा है साथ
 चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रूस के अपने समकक्ष व्लादिमीर पुतिन से सोमवार को फोन पर बात की और कहा कि वह यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के मॉस्को के प्रयासों से खुश हैं. सरकारी प्रसारक ‘सीसीटीवी’ की खबर के मुताबिक, पुतिन ने शी को अमेरिका के साथ हाल-फिलहाल में हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी.  खबर के अनुसार, शी ने कहा कि “चीन इस बात से खुश है कि रूस और संबंधित पक्षों ने संकट का समाधान निकालने के लिए सकारात्मक प्रयास किए हैं.”

क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, चीनी पक्ष ने रूस और अमेरिका के बीच बातचीत के प्रति “समर्थन जताया और कहा कि वह संघर्ष को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने में मदद देने के लिए तैयार है. 

अमेरिका का तेजी से बदल रहा है रुख 
डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया. इसके बाद से उन्होंने यूक्रेन में चुनाव कराने पर जोर दिया है. उन्होंने जेलेंस्की को तानाशाह बताया है. दरअसल उन्होंने 2024 में खत्म हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति के कार्यकाल का संदर्भ दिया. वह इस युद्ध के लिए यूक्रेन को ही जिम्मेदार ठहराते हुए भी नजर आए. इस युद्ध को रूस ने 22 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला कर शुरू किया था. 

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