अनमोल पचौरी आर्यभट मीडिया
बदलते वक़्त के साथ युवा नेता दुनिया की बागडोर सम्हाल रहे है, कुछ साल पहले एक पत्रकार ने सना मरीन से पूछा कि क्या वह अपनी पार्टी, सोशल डेमोक्रेट्स, की लीडर बनने जा रही हैं? उन्होंने पत्रकार की तरफ बड़ी हैरत भरी निगाहों से देखा जैसे वह कह रही हों, ‘क्या वाकई तुम मुझसे यह पूछ रहे हो?’ ऐसी स्थिति जहां ज्यादातर राजनेता अपनी महत्वाकांक्षाओं को छिपाते हैं, मरीन अपने इरादों को लेकर बेहद मुखर थीं। दो साल पहले 34 साल की सना मरीन ने अपनी महत्वाकांक्षा को छिपाने के बजाय उन्हें पूरा किया और दुनिया की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनीं। सना मरीन ने फैसला लिया है कि उनका देश नाटो में शामिल होगा, इस बात की परवाह किए बिना कि रूस इस पर किस तरह की प्रतिक्रिया देगा। यूक्रेन युद्ध से पूरी दुनिया को खौफजदा करने वाले पुतिन से बेखौफ सना मरीन ने हाल ही में ब्रिटेन से रक्षा क्षेत्र में हाथ मिलाया है। नाटो में शामिल होने का इरादा रखने वाली फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन सीधे तौर पे पुतिन की आंख में आंख डालके चुनौती दे रही है.
हाल ही में फिनलैंड और स्वीडन ने ब्रिटेन के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है जिसके तहत रूसी हमले की स्थिति में देश एक-दूसरे की मदद करेंगे। रूस और फिनलैंड के बीच एक लंबी भू-सीमा है। एक खतरनाक पड़ोसी होने के चलते फिनलैंड ने लंबे समय तक तटस्थ नीति का पालन किया लेकिन यूक्रेन पर हमले ने सभी समीकरणों को बदल दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से बहुत पहले, सना मरीन ने अपने नए साल के संबोधन में कहा था कि फिनलैंड को नाटो में शामिल होने का अधिकार है और उसे इस पर विचार करना चाहिए। रूसी मीडिया ने इसे ‘पीठ में छुरा घोंपना’ बताया था।
युद्ध के मास्टरमाइंड पुतिन से मुकाबला
अब उनका मुकाबला एक बिल्कुल नए संकट से है। उनके सामने आक्रामक पुतिन हैं जो युद्ध के लिए बिसात बिछाने में माहिर हैं। पुतिन न ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों की परवाह करते हैं और न ही उन्हें प्रतिबंधों या अंतरराष्ट्रीय कोर्ट का डर है। लंबे समय तक तटस्थ रहने के बाद अब सना मरीन के एक फैसले ने रूस में हड़कंप मचा दिया है। रूस ने मरीन की घोषणा के बाद चेतावनी दी है और कहा है कि मॉस्को ‘सैन्य कार्रवाई’ के लिए मजबूर हो सकता है। फिनलैंड पर रूस की तरफ से गैस और बिजली सप्लाई को रोकने का खतरा अभी से मंडरा रहा है।
