अनमोल पचौरी :ब्यूरो चीफ 28-04-2022
वैश्विक ट्रेड में जिस तरीके से स्थिति रूस यूक्रेन युद्ध के बाद बदली है वैसा केवल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ही हुआ था इस बीच कई युद्ध हुए लेकिन पश्चिमी देशों की ट्रेडिंग नीति नहीं बदली या कुछ बदलाव किए भी गए तो वह छोटे-मोटे ही थे. लेकिन जिस तरीके से यूक्रेन पर हमला करने के बाद रूस के ऊपर सैंक्शंस लगाए गए हैं उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की भारत में मिलने वाले एप्पल के लैपटॉप की कीमत जो कि 2 से ढाई लाख रुपए है वह रूस में अब 8 से दस लाख रुपए का हो गया है । रूस चाहे कितना भी मना कर ले लेकिन वैश्विक सैंक्शन ने रूस की कमर तोड़ कर रख दी है.
मौजूदा स्थिति में चीजें इतनी तेजी से बदल रही हैं की एक छोटी सी चूक और भारत का वैश्विक शक्ति बनने का सपना चूर चूर हो सकता है.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकार को यह सलाह दी है कि वह तेजी से बदलते हालातों में कुछ शॉर्ट टर्म फायदों के लिए कहीं भविष्य में भारत का बड़ा नुकसान ना कर बैठे.
मनमोहन सिंह ने कहा कि इस युद्ध के माहौल में जहां पूरी दुनिया दो भागों में बट गई है वहीं भारत का न्यूट्रल रहना भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है. लेकिन इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए की पश्चिमी देशों से ट्रेड करना ही भारत के लिए फायदेमंद है जो फायदा पश्चिमी देश भारत को दे सकते हैं वह फायदा कभी भी रूस और चीन जैसे देश भारत को नहीं दे पाएंगे .
हाल ही में अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने प्रिंसिपल ट्रेड की नीति को लागू किया है यानी वह उन्हीं देशों के साथ ट्रेड करेंगे जहां लोकतंत्र मजबूत है और ऐसे में भारत के लिए एक बड़ी अपॉर्चुनिटी सामने खड़ी हो जाती है . रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारत को कुछ समय के लिए थोड़ा फायदा तो दे सकता है लेकिन भविष्य में इससे कुछ खास फायदा होने वाला नहीं है भारत कभी भी डॉलर की उपेक्षा न करें, जैसा कि हाल ही में चीन और रूस ने डॉलर का बायकाट किया है और उन्हीं को देखकर कुछ छोटे देशों ने भी डॉलर का बायकाट किया है. यह कदम पूरी तरीके से विनाशकारी साबित हो सकता है अमेरिका दुनिया में एक आर्थिक महाशक्ति है इसको झुटलाया नहीं जा सकता ऐसे में खुद को सशक्त करने का तरीका वेस्टर्न ट्रेड का हिस्सा बनकर ही हो सकता है. अमेरिकी डॉलर का भारत जितना रिजर्व अपने पास बढ़ाएगा उतना ही भारत को भविष्य में फायदा होगा यहां पर हम आपको बताते चलें कि भारत ने अभी अपनी लगभग 260 मिलियन डॉलर लोन की एक किश्त वर्ल्ड बैंक को जमा की है जिसका भुगतान भारत ने डॉलर के रूप में ही किया है. वरना इतनी बड़ी रकम यदि भारत रुपए में करता तो भारत के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो जाता. इसीलिए अर्थशास्त्री भारत में डॉलर रिजर्व बढ़ाने पर हमेशा जोर देते आए हैं.
यह भारत का सौभाग्य ही है कि भारत में पूर्व प्रधानमंत्री हमेशा लोकतंत्र का सम्मान करते हैं और एक डेकोरम बनाकर रखा गया है, पॉलिटिक्स को राष्ट्र हित पर हावी नही होने दिया, हमेशा अपने कार्यकाल का अनुभव सांझा किया है इससे देश की उन्नति में लाभ हो और भारत निरंतर तरक्की के रास्ते की ओर बढ़ता चला जाए
