नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, जिसे चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार, शरदीय नवरात्र में इस पाठ को करने और इसमें दिए गए विशेष स्तुति मंत्रों का जाप करने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिलती है। इन मंत्रों का अलग-अलग उद्देश्यों के लिए जाप किया जाता है।

दुर्गा सप्तशती के प्रमुख और प्रभावशाली मंत्र
काम में सफलता और कल्याण प्राप्ति के लिए ‘शरणागतदीनार्त्त-परित्राणपरायणे’ मंत्र का जाप किया जाता है। इसका अर्थ है कि शरण में आए असहायों और पीड़ितों की रक्षा करने वाली नारायणी देवी सबका कष्ट दूर करें और सभी आपत्तियों का नाश करें। इसके अलावा, मां दुर्गा से मनचाहा वरदान पाने के लिए ‘बभूवान्तर्हिता सद्यो भक्त्या’ मंत्र का उपयोग किया जाता है, जिससे राजा सुरथ और वैश्य को वरदान मिलने का प्रसंग जुड़ा है।
अकाल मृत्यु और विपत्तियों से रक्षा के उपाय
अकाल मृत्यु के भय से बचने के लिए ‘शूलेन पाहि नो देवि’ मंत्र का उच्चारण किया जाता है, जिसमें देवी से त्रिशूल, तलवार, घंटे की ध्वनि और धनुष की टंकार से रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है। किसी भी प्रकार की विपत्ति के नाश के लिए ‘दुर्ग्गे स्मृता हरसि भीतिम्’ मंत्र बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, जो संकट में स्मरण करने पर भय दूर करता है और शांत मन से ध्यान करने पर उत्तम बुद्धि प्रदान करता है।
बाधाओं का नाश और धन-धान्य की प्राप्ति
जीवन की बाधाओं को दूर करने और शत्रुओं के नाश के लिए ‘सर्व्वबाधाप्रशमनन् त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि’ मंत्र का विधान है। वहीं, बाधा मुक्ति, धन लाभ और संतान सुख के लिए ‘सर्व्वबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः’ मंत्र का जाप किया जाता है, जिसके प्रभाव से मनुष्य सभी परेशानियों से मुक्त होकर सुख प्राप्त करता है। इन सभी मंत्रों का उल्लेख कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय से प्रकाशित दुर्गा सप्तशती पुस्तक में मिलता है।
