पलामू के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता ब्रजमोहन राम को ओड़िशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी इस महत्वपूर्ण नियुक्ति से पलामू और पूरे झारखंड क्षेत्र में हर्षोल्लास का माहौल देखा जा रहा है। जमीनी स्तर से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले ब्रजमोहन राम ने विधायक और सांसद के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही पार्टी संगठन में भी कई बड़े पदों की जिम्मेदारी संभाली है।

लातेहार से विधायक और तीन बार रहे सांसद
ब्रजमोहन राम ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत वर्ष 1991 में की थी, जब वह लातेहार विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने वर्ष 1991 से 1995 तक बतौर विधायक अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने संसदीय राजनीति में कदम रखा और वर्ष 1996, 1998 तथा 1999 में पलामू लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए। संसद में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण समितियों में सक्रिय भूमिका निभाई और विभिन्न मंत्रालयों के नीतिगत विषयों से जुड़े कार्यों में हिस्सा लिया।
भाजपा संगठन में निभाई प्रमुख जिम्मेदारियां
संसदीय कार्यों के अलावा ब्रजमोहन राम भारतीय जनता पार्टी के संगठन में भी अत्यंत सक्रिय रहे। उन्होंने वर्ष 1996 से 1998 तक रांची वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष का दायित्व निभाया। इसके अतिरिक्त, वह झारखंड भाजपा के उपाध्यक्ष और अनुसूचित जाति मोर्चा के राज्य प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर भी कार्यरत रहे। अनुसूचित जाति के प्रमुख नेताओं में गिने जाने वाले ब्रजमोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को हुआ था।
पलामू प्रमंडल से राज्यपाल बनने वाले दूसरे नेता
पलामू लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद रहने के बाद अब उन्हें देश के एक महत्वपूर्ण राज्य के राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि वह पलामू प्रमंडल से राज्यपाल बनने वाले दूसरे नेता हैं। उनसे पहले पलामू के ही भीष्म नारायण सिंह विभिन्न राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। विधायक, सांसद और संगठनात्मक दायित्वों को सफलतापूक निभाने के बाद राज्यपाल पद पर उनका पहुंचना उनके लंबे राजनीतिक करियर का एक नया और अहम पड़ाव है।
