झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में हुई व्यापक गड़बड़ियों की जांच के दौरान सीआईडी को एक बड़े आपराधिक सिंडिकेट के संकेत मिले हैं। अधिकारियों ने बैंक खातों के लेन-देन, मोबाइल लोकेशन और अन्य ठोस साक्ष्यों के आधार पर इस बात की पुष्टि की है कि परीक्षा पास कराने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय था।

नेपाल तक फैला था पेपर लीक और सॉल्वर गिरोह का नेटवर्क
जांच एजेंसी ने अदालत को जानकारी दी है कि इस गिरोह का जाल झारखंड के बोकारो के दुग्धा के अलावा पटना, कोलकाता, आसनसोल, दुर्गापुर और पड़ोसी देश नेपाल तक फैला हुआ था। परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को अलग-अलग जगहों पर होटलों में रखकर प्रश्न और उनके उत्तर रटवाए जाते थे। इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के बैंक खातों की जांच में भारी मात्रा में पैसों के लेन-देन की बात सामने आई है। शुरुआती दौर में आरोपियों ने गोलमोल जवाब दिए थे, लेकिन सीआईडी की कड़ी पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के मिलान के बाद सिंडिकेट की पूरी परतें खुलने लगी हैं।
हाईकोर्ट में रिट याचिकाएं टैग करने का आग्रह खारिज
दूसरी ओर, इस प्रकरण से जुड़े कानूनी मामलों में झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिकाओं को अपील याचिका के साथ जोड़ने के विशेष आग्रह को ठुकरा दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि एकल पीठ में मामले की सुनवाई अंतिम चरण में है, इसलिए इसे खंडपीठ में स्थानांतरित करना नियमों और याचिकाओं के अधिकारों के अनुरूप नहीं होगा।
दो आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी हुईं खारिज
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा गड़बड़ी के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों, मिथिलेश कुमार पांडेय और मनु कुमार सिंह की जमानत अर्जी अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने खारिज कर दी है। इन दोनों पर अपने संपर्कों के जरिए परीक्षार्थियों की सेटिंग करने और उन्हें धनबाद तथा बोकारो में परीक्षा के उत्तर रटवाने में मदद करने का गंभीर आरोप है। सीआईडी इस मामले में लगातार गिरफ्तारियां कर रही है और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश जारी है।
