बिहार विधान परिषद चुनाव: सवर्ण उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की मची होड़

बिहार विधान परिषद चुनाव के नजदीक आते ही राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी रणनीतियों में बड़ा बदलाव किया है। बांकीपुर उपचुनाव में सवर्ण मतदाताओं के रुख और जन सुराज के प्रभाव को देखते हुए इस बार उम्मीदवारों के चयन में सवर्ण चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही इस वर्ग के मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

बिहार विधान परिषद चुनाव: सवर्ण उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की मची होड़

महागठबंधन का बड़ा दांव और प्रत्याशियों की सूची

आमतौर पर सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाले महागठबंधन ने इस चुनाव में एनडीए से भी आगे निकलते हुए अधिक सवर्ण उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं। राष्ट्रीय जनता दल ने पटना और दरभंगा सीटों पर सवर्ण प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार सिंह और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अनिल कुमार झा को मैदान में उतारा गया है। इसके अलावा तिरहुत स्नातक सीट से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है। महागठबंधन की सहयोगी कांग्रेस पार्टी ने भी अपने पुराने दिग्गजों जैसे डॉ. मदन मोहन झा और रजनीकांत पाठक को टिकट दिया है, जबकि वामदल ने तिरहुत शिक्षक सीट से प्रो. संजय कुमार सिंह पर दांव लगाया है।

एनडीए खेमे की रणनीति और आंतरिक चुनौतियां

दूसरी ओर, एनडीए ने भी अपनी चुनावी रणनीति के तहत कई सवर्ण चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने कोटे से दरभंगा स्नातक सीट के लिए सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक सीट के लिए नरेंद्र प्रसाद सिंह को प्रत्याशी बनाया है। वहीं जनता दल यूनाइटेड ने अपने चार में से तीन उम्मीदवार सवर्ण समाज से ही चुने हैं, जिसमें पटना स्नातक से नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक से अभिषेक झा और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आनंद पुष्कर के नाम शामिल हैं। हालांकि, जदयू के इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा पारंपरिक वोट बैंक को नजरअंदाज किए जाने को लेकर दबी जुबान से चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।

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