पश्चिम बंगाल में इस वर्ष दुर्गा पूजा के आयोजनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है, जहां राज्य सरकार ने कुल 12,400 नए दुर्गा पूजा पंडालों और आयोजनों को आधिकारिक रूप से अनुमति प्रदान की है। कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डेंस मैदान में ‘देवीपक्ष’ के पावन शुभारंभ अवसर पर आयोजित एक विशेष और भव्य कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण घोषणा सामने आई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस उत्सव के दौरान राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला।

नये आयोजनों और सरकारी सहायता पर बड़ी घोषणा
ईडन गार्डेंस में उपस्थित जनसमूह और आयोजकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि इस बार राज्यभर में व्यापक स्तर पर नए पंडाल स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले वर्ष पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के लगभग 45,000 आयोजन हुए थे, और वर्ष 2025 में आयोजित कुल पूजाओं की संख्या की तुलना में इस बार हमारे पास 12,400 नई पूजाएं और पंडाल जुड़ गए हैं। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों के दौर को याद करते हुए कहा कि पहले के समय में दुर्गा पूजा आयोजित करने के लिए लोगों और समितियों को आवश्यक अनुमतियों के वास्ते कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता था जो कि एक अत्यंत दुखद स्थिति थी। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इस बार इस प्रकार की कोई भी अप्रिय या कठिन परिस्थिति सामने नहीं आई है।
अनुदान वितरण और धार्मिक परंपराओं का पालन
राज्य सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल की प्रत्येक पंजीकृत दुर्गा पूजा समिति को एक लाख रुपये का वित्तीय अनुदान प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य प्रशासन रविवार से विभिन्न क्लबों और समितियों को यह अनुदान राशि वितरित करने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। इसके अलावा, मंत्रिमंडल की बैठक में यह भी स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि दुर्गा पूजा की शुरुआत ‘पितृपक्ष’ के दौरान नहीं की जाएगी। सरकार ने पारंपरिक हिंदू पंचांग के अनुसार धार्मिक रीति-रिवाजों का सख्ती से पालन करते हुए आज ‘देवीपक्ष’ के आगमन और शुरुआत के साथ ही इस भव्य उत्सव का आधिकारिक उद्घाटन किया है, जिससे सांस्कृतिक पहलुओं के साथ धार्मिक मान्यताओं का भी पूरा सम्मान हो सके।

विभिन्न क्षेत्रों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
दुर्गा पूजा के इस उत्सव को और अधिक व्यापक और आनंदमय बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने आगामी चार दिनों के भीतर यानी षष्ठी तक राज्य के कई प्रमुख शहरों और क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की। इसके तहत दुर्गापुर, बिष्णुपुर, सिलीगुड़ी, कूचबिहार, मालदा, बहरमपुर और दीघा जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्यभर में उत्सव का माहौल चरम पर पहुंच जाएगा।
