वैसे तो सरकार अफीम की खेती और उससे बनने वाली नशीले पदार्थ के खिलाफ है और इससे जुड़े कई कठोर कानून भी बनाये गए है . लेकिन क्या आप जानते है जिस काम के लिए सरकार आपको रोकती है उसी काम को सरकार खुद बड़े पैमाने पर आजादी के बाद से करती आई है .
देश में अफीम की खेती पुर्तगालियो ने शुरू की थी ड्रग्स के रूप में पुर्तगाली ही अफीम को चीन लेके गये थे ,चीनियो को इसकी भारी लत लग गयी पुर्तगालियो के बाद इस काम को ईस्ट इंडिया कम्पनी ने अपने हाथ में लियां और अफीम को कच्चा व ड्रग्स बना कर चीन एक्सपोर्ट करने लगी थी . बाद में चीन के राजा जब सख्त हुए तो उन्होंने देश (चीन ) में अफीम को प्रतिबन्ध कर दिया. लेकिन ईस्ट इंडिया कमपनी यही नही रुकी और अवैध तस्करी कर के चीन को अफीम बेचती रही और भारी मुनाफा कमाया .
चीन को सप्लाई करने के लिए बिहार ,ओडिशा ,वेस्ट बंगाल के किसानो का भरपूर इस्तेमाल किया गया .
कालान्तर में देश आज़ाद हुआ और भारत सरकार ने इस खेती को जारी रखा ,लेकिन यहाँ पर भारत सरकार का उद्देश्य इसको नशीला पदार्थ बना कर पैसे कमाना नहीं बल्कि इसका मेडिकल यानि चिकित्सीय उपयोग ज्यादा महत्वपूर्ण था ,यदि आप भारतीय वैदिक मेडिकल साहित्य का अध्ययन करेंगे जैसे भावप्रकाश ,शोदल गदा निग्रह ,शारंग धर सहिंता में अफीम को बेहद उपयोगी बताया गया है ,सेक्स सम्सायो के लिए अफीम को बेहद उपयोगी और कारगर बताया गया है ,धन्वन्तरी निघंटु पुस्तक में अफीम के उपयोग पर पूरा एक भाग लिखा है . 8 वी शताब्दी से ही देश में अफीम को चिकित्सा में उपयोग जारी है ,वैद इस पौधे के कई गुण जानते है .
अब जानते है भारत सरकार अब इसका क्या इस्तेमाल कर रही है ?
भारत कानूनी रूप से अफीम और कानूनी रूप से अफीम गम पैदा करता है. यू एन ओ के मुताबिक गिने चुने १२ देश ही इसको उगा सकते है और भारत उनमे से एक है । अफ़ीम में कोडीन और थेबेन के रूप में कई अपरिहार्य एल्कलॉइड होते है, जो अफीम गम का स्रोत है। अफ़ीम दुनिया में सबसे अच्छा एनाल्जेसिक है यानी दर्द निवारक है । अफीम गम से मोर्फीन बनता है जो बीमार कैंसर रोगियों के भीषण दर्द को खत्म या उसमे आराम देता है . अफीम में मोजूद कौडीन आमतौर पर खांसी सिरप के निर्माण में प्रयोग किया जाता है इसीलिए आपको खांसी की दवाई लेने के बाद नींद आती है .
एनडीपीएस एक्ट की अनुमति और मेडिकल और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए अफीम की खेती को विनियमित केन्द्र सरकार करती है। भारत सरकार ने अफीम की खेती के लिए हर साल लाइसेंस जारी करने के लिए सामान्य शर्तों के रूप में बोर्ड बनाया है जो नियमो के अंतर्गत लाइसेंस जारी करता है । अफीम की खेती मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों में अधिसूचित इलाकों में सरकार की निगरानी में होती है । किसान खेती कर सारी अफीम को सरकार को बेच देते है और सरकार किसानो को उचित मूल्य देती है ,गौर हो की अफीम की खेती की बड़ी ही सख्त निगरानी की जाती बीज बोने से कटाई तक सरकार की इस पर पैनी नजर रहती है .