सोशल मीडिया प्रमुख मेटा ने शनिवार को कहा कि भारत दुनिया की सबसे लंबी समुद्री केबल परियोजना ‘वाटरवर्थ’ (Waterworth) से जुड़ेगा, जिसके इस दशक के अंत तक चालू होने की उम्मीद है. मेटा ने ‘प्रोजेक्ट वाटरवर्थ’ की घोषणा की है, जो पांच प्रमुख महाद्वीपों तक पहुंचेगा और 50,000 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा. इसकी लंबाई पृथ्वी की परिधि से भी अधिक है. यह परियोजना अमेरिका-भारत संयुक्त नेतृत्व बयान का हिस्सा थी, जिसे 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद जारी किया गया था.

मेटा के प्रवक्ता ने शनिवार को कहा, ”मेटा भारत में निवेश कर रहा है, जो इसके सबसे बड़े बाजारों में से एक है. भारत, अमेरिका और अन्य स्थानों को जोड़ने के लिए दुनिया की सबसे लंबी, सबसे अधिक क्षमता वाली और सबसे तकनीकी रूप से उन्नत समुद्री केबल परियोजना लाई जा रही है.”

समुद्री केबल है महत्वपूर्ण

इंटरनेट संचालन के लिए समुद्री केबल महत्वपूर्ण हैं. ये केबल देशों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं. स्थानीय दूरसंचार परिचालक अपने ग्राहकों को इंटरनेट पहुंच देने के लिए समुद्री केबल से जुड़ते हैं. यह निवेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दूरसंचार परिचालक डेटा भार को कम करने और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए मेटा सहित बड़ी तकनीकी कंपनियों से निवेश करने की मांग कर रहे हैं.

प्रवक्ता ने कहा, ”डिजिटल सेवाओं के लिए भारत की बढ़ती मांग से प्रेरित, यह निवेश आर्थिक वृद्धि, लचीले बुनियादी ढांचे और डिजिटल समावेशन के लिए मेटा की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है. इससे भारत के डिजिटल परिदृश्य और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा.”

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