अदाणी ग्रुप समेत कई बिजनेस ग्रुप को साजिश के तहत निशाना बनाने वाली अमेरिका की शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग (Hindenburg Research) पर ताला लगने जा रहा है. अमेरिका में 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर शपथ से पहले हिंडनबर्ग ने शटडाउन का ऐलान किया. हिंडनबर्ग ने जिस तरह से भारत के बिजनेस ग्रुप और इंवेस्टर्स को टारगेट किया. शॉर्ट सेलिंग से मुनाफा कमाया… ये भारत की कंपनियों और इंस्टिट्यूट के लिए बड़ा सबक है. इस बीच मार्केट रेगुलेटर SEBI के पूर्व एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर जेएन गुप्ता ने समझाया कि भविष्य में SEBI शॉर्ट सेलिंग के मामलों से कैसे निपट सकती है.

जेएन गुप्ता ने कहा कि हिंडनबर्ग मामले में सबसे अजीब बात यह रही है कि एक अनजान आदमी की संस्था की रिपोर्ट पर भारत के राजनीतिक दलों ने किस तरह से प्रतिक्रिया दी. इन लोगों ने न कंपनी पर विश्वास किया, न SEBI पर भरोसा दिखाया. बैंकर पर भी यकीन नहीं रखा.

गुप्ता ने कहा, “हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद कुछ लोगों ने पैनिक क्रिएट किया. इससे निवेशकों का नुकसान हुआ. उन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए SEBI का एक नियम भी है. सबको इस कानून के दायरे में लाकर कार्रवाई करनी चाहिए.”

गुप्ता ने कहा, “बड़ा सवाल ये है कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद और ट्रंप सरकार बनने से पहले हिंडनबर्ग कैसे बंद हो गया? हिंडनबर्ग अपने पीछे किन-किन लोगों को छिपा रहा है? पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कौन है? इन सारे सवालों के जवाब आने बाकी हैं.” 

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