इस एक्ट्रेस ने  हिन्दी फिल्मों के साथ ही तेलुगु, तमिल और बंगाली फिल्मों में काम किया. वह 1950, 1960 और 1970 के दशक की शुरुआत तक फिल्मों में खूब एक्टिव थीं. इस एक्ट्रेस कोअपने पूरे करियर में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए दो फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुके हैं.इनका जन्म भारत के तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में मुस्लिम परिवार में हुआ था. इन्होंने अपनी बहन के साथ चेन्नई में भरतनाट्यम सीखा. जब वह किशोरावस्था में थी, उनके जिला आयुक्त पिता की मृत्यु हो गई थी. सबसे पहले उन्होंने 1955 में तेलुगू फिल्मों से शुरुआत की थी. फिर कुछ तमिल फिल्मों में भी उन्होंने काम किया. बाद में उन्होंने हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया और स्टार बनी.

बता दें कि इस एक्ट्रेस की भारी फैन फॉलोइंग थी. सुपरस्टार्स भी इनके दीवाने थे. उनमें से एक अमिताभ भी अपने समकालिन एक्ट्रेस के बहुत बड़े फैन हैं. हम बात कर रहे हैं वहीदा रहमान की. अमिताभ ने एक बार उनके जूते भी उठाए थे ताकि वह रेगिस्तान में नंगे पैर खड़ी न हों. बिग बी ने कहा, “पहली बार मुझे उनके साथ फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ में काम करने का मौका मिला था तो शूटिंग के दौरान एक सीक्वेंस था जिसमें सुनील दत्त और वहीदा जी को रेगिस्तान में नंगे पैर बैठना था. जहां उच्च तापमान के कारण हमारे जूते पहनकर रेत में खड़ा होना असंभव था. मैं बहुत चिंतित था कि वहीदा जी इतनी विषम परिस्थितियों में और वह भी बिना जूते के कैसे शूटिंग कर रही थीं. इसलिए जैसे ही निर्देशक ने ब्रेक की घोषणा की, मैंने बिना समय बर्बाद किए वहीदा जी की जूतियां लीं और उनकी ओर दौड़ पड़ा. मैं यह भी नहीं बता सकता कि यह पल मेरे लिए कितना खास है.” बिग बी ने बाद में वहीदा रहमान के  साथ त्रिशूल, अदालत और नमक हलाल जैसी फिल्मों में काम किया.

अमिताभ बच्चन ने एक बार शेयर किया था कि वह दिलीप कुमार और वहीदा रहमान को अपना आदर्श मानते हैं. सुपरस्टार सिंगर के सेट पर वहीदा रहमान और आशा पारेख के साथ दिखाई देने वाले एक्टर ने कहा, “वहीदा रहमान हमेशा से मेरे लिए सबसे खूबसूरत महिला रही हैं. वह न केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं, बल्कि अपने स्वभाव से एक बेहतरीन इंसान भी हैं. मेरे लिए वहीदा जी भारतीय महिला का एक आदर्श उदाहरण हैं. वहीदा जी ने हमारे बॉलीवुड में बहुत बड़ा और अविश्वसनीय योगदान दिया है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.”

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