गायक और संगीत निर्देशक प्रतुल मुखोपाध्याय का शनिवार को कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया. वह 82 वर्ष के थे. गायक को कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका लंबे समय से इलाज चल रहा था. उनके इलाज के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गायक के लिए सर्वोत्तम उपचार सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से पहल की और हाल ही में उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए एसएसकेएम अस्पताल पहुंची थीं. हालांकि, लंबे समय से अस्पताल में भर्ती मुखोपाध्याय के स्वास्थ्य में सुधार नहीं था और शनिवार सुबह 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

संयोग से मुखोपाध्याय की मृत्यु राज्य के संगीत जगत की दो अन्य हस्तियों संध्या मुखोपाध्याय और बप्पी लाहिड़ी की पुण्यतिथि के साथ मेल खाती है. संध्या मुखोपाध्याय और बप्पी लाहिड़ी का निधन 15 फरवरी 2022 में हुआ था. प्रतुल मुखोपाध्याय का जन्म 25 जून 1942 को तत्कालीन बंगाल के बारीसाल में हुआ था, जो अब बांग्लादेश का हिस्सा है. उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे. विभाजन के बाद उनका परिवार पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के चिनसुरा चला गया था, जहां गायक ने अपना बचपन बिताया. बहुत छोटी उम्र से ही उनमें संगीत के लिए लगाव देखा गया. जब वह सिर्फ 12 साल के थे, तब उन्होंने मंगलाचरण चट्टोपाध्याय के एक लोकगीत की धुन तैयार की थी.

‘अमी बांग्लाई गान गाई’ (मैं बंगाली में गाता हूं) जैसे गीतों में बंगाली भाषा के प्रति उनका जुनून स्पष्ट दिखाई देता है. लोक संगीत के प्रति उनका जुनून ‘अमी धान कटार गान गाई’ (मैं धान की कटाई का गीत गाता हूं) जैसे गीतों में भी दिखाई देता है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक संदेश में मुखोपाध्याय के निधन पर शोक व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने गायक से अस्पताल में मुलाकात की थी, जहां उन्हें कुछ दिन पहले भर्ती कराया गया था. उनका निधन पश्चिम बंगाल के संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. मैं प्रतुल मुखोपाध्याय के परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं.”

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