Ramdan 2025: माह-ए-रमजान चल रहा है. मुस्लिम समुदाय में रोजा रखने का विशेष महत्व होता है. रमजान के महीने में 30 दिन तक रोजा रखा जाता है. दिन की शुरुआत सहरी से होती है, दिनभर बिना पानी पिए ही रहा जाता है और शाम को इफ्तारी खाकर हर दिन का रोजा पूरा होता है. एक महीने तक यही सिलसिला चलता है. ऐसे में अक्सर ही रोजा (Roja) रखने से जुड़े कई सवाल मन में आते हैं. जैसे कितने साल के बच्चे रोजा रख सकते हैं. रोजे में क्या क्या करना चाहिए. किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए. जानिए अपने सवालों के जवाब. 

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कितने साल के बच्चों के लिए रोजा रखना जरूरी है?

इस सवाल के जवाब में इस्लामिक स्कॉलर बताते हैं, ‘जिसके अंदर इतनी शक्ति है कि वो बिना कुछ खाए-पिए सुबह से शाम तक रह सकता है, ऐसे लोगों को रोज़ा रखना चाहिए. अगर कोई बीमार है, या बच्चे या कोई बुजुर्ग जो रोजा न रख सकते हों, तो उनके लिए आजादी है कि वो रोजा न रखें. जब तबीयत सही हो जाए, उन रोजों को बाद में रखना पड़ेगा. 14 साल के बाद रोजा बच्चों पर वाजिब माना जाता है. 

रोजा में क्या-क्या करना चाहिए 

इस सवाल के जवाब में इस्लामिक स्कॉलर ने कहा, रोजा इबादत है. इसलिए इसमें ज्यादातर वक्त इबादत में गुजरना चाहिए. जैसे कुरान-ए-मजीद पढ़ें. मजहब की किताब पढ़ें. नेक बातें कहिए और सुनिए. दुआएं पढ़ते रहें, जिससे खुदा से राब्ता (रिश्ता) करीबी बना रहे. गरीब लोगों की मदद करें, कोई ऐसा पड़ोस में न हो कि उसके घर में इफ्तार के लिए खाना न हो और हम लोग आराम से करें, पड़ोसी का हक भी सबसे पहले है. इसमें हर किसी को मोहब्बत के साथ रोजे रखने चाहिए और मिल-जुलकर एक साथ खुशी का त्योहार मनाना चाहिए, साथ ही फितरा जकात देनी चाहिए, जिससे गरीब लोगों को उनका हक पहुंच सके.

 

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