अलगाववादी नेता यासीन मलिक को पटियाला हाउस कोर्ट में टेरर फंडिंग केस में उम्रकैद की सजा सुनाई। यासीन को NIA कोर्ट पहले ही दोषी करार दे चुका था। एडवोकेट उमेश शर्मा ने बताया कि यासीन को दो मामलों में उम्रकैद, 10 मामलों में 10 साल की जेल और 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
यासीन पर पाकिस्तान के समर्थन से कश्मीर में आतंकी घटनाओं के लिए फंडिंग करने और आतंकियों को तबाही का सामान मुहैया कराने के केस दर्ज थे।
दो मामलों में उम्रकैद और 10 लाख का जुर्माना भी
- IPC की धारा 120 बी के तहत 10 साल की सजा, 10 हजार जुर्माना
- IPC की धारा 121 के तहत उम्रकैद, 10 हजार जुर्माना
- IPC की धारा 121 ए के तहत 10 साल की सजा 10 हजार जुर्माना
- UAPA की धारा 13 के तहत 5 साल की सजा, 5 हजार जुर्माना
- UAPA की धारा 15 के तहत 10 साल की सजा, 10 हजार जुर्माना
- UAPA की धारा 17 के तहत उम्रकैद और 10 लाख जुर्माना
- UAPA की धारा 18 के तहत 10 साल की सजा और 10 हजार जुर्माना
- UAPA की धारा 20 के तहत 10 साल की सजा और 10 हजार जुर्माना
- UAPA की धारा 38 और 39 के तहत 5 साल 5 हजार जुर्माना
फांसी से बचा तो वकील को गले लगा लिया
सजा सुनने के बाद यासीन मलिक ने अपने वकील एपी सिंह को गले लगाया। सजा से पहले पटियाला हाउस कोर्ट की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। वहीं, श्रीनगर के कई बाजार बंद हो गए और वहां भारी फोर्स तैनात है। सुरक्षा के लिहाज से श्रीनगर और आसपास के इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट सर्विस बैन कर दी गई है।
इन्साफ मिलना अभी बाकी
हालाँकि यह मुकद्दमे उन मामलो से अलग है जिनपर जनता भावनात्मक रूप से जुडी हुई जिनमे एयरफोर्स अधिकारिओ की हत्या ,और कश्मीरी हिन्दुओ का कत्लेआम शामिल है . जनता को और पीड़ित परिवार वालो को अभी भी इन्साफ से संतुष्टी नही हुई
