प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर आवेदन पर दीमापुर की विशेष न्यायालय (PMMLA) ने भूपेश अरोड़ा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA), 2018 के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया. यह फैसला 22 जनवरी 2025 को HPZ Token और अन्य मामलों में सुनाया गया. ईडी ने इस मामले की जांच साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, कोहिमा (नागालैंड) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की.

भूपेश अरोड़ा और उनके सहयोगियों ने निवेशकों को बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो करेंसी माइनिंग में निवेश के नाम पर भारी मुनाफे का वादा करके ठगा. इसके लिए HPZ टोकन नामक एक ऐप-आधारित टोकन का इस्तेमाल किया गया.

जांच में यह सामने आया कि धोखाधड़ी से जुटाए गए पैसों को शेल कंपनियों, व्यक्तियों और फर्मों के माध्यम से कई बार ट्रांसफर कर काले धन को सफेद किया गया. बयान और सबूतों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि भूपेश अरोड़ा और उनके सहयोगी इस धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड थे. इसके अलावा, ठगी से जुटाए गए पैसे विदेशों में भी भेजे गए थे.

अब तक, ईडी ने लगभग 2200 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा किया है और 497.20 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त और फ्रीज कर दिया है. भूपेश अरोड़ा ने 200 से अधिक कंपनियां बनाई थीं, ताकि लेनदेन को ट्रैक किया न जा सके. भूपेश अरोड़ा को ईडी के समन का पालन करने का निर्देश दिया गया था.

गौहाटी हाईकोर्ट, कोहिमा बेंच ने 25 सितंबर 2023 को आदेश दिया था कि भूपेश अरोड़ा जांच में सहयोग करें. लेकिन उन्होंने आदेश का पालन नहीं किया. इसके बाद, विशेष न्यायालय ने जुलाई 2024 में उनका गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया. भूपेश अरोड़ा सितंबर 2022 में दुबई भाग गए थे और भारत लौटने से इनकार कर दिया.

ईडी ने भूपेश अरोड़ा से जुड़े संपत्तियों और बैंक खातों पर कार्रवाई की. इनमें दिल्ली में 2.05 करोड़ रुपये मूल्य की 9 अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं. इसके अलावा, 20 राज्यों (दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, असम, यूपी, छत्तीसगढ़, एमपी, ओडिशा, तेलंगाना आदि) में फैले 286 बैंक और वर्चुअल खातों से 459.79 करोड़ रुपये की राशि जब्त की गई है.

ईडी अब अन्य कंपनियों और खातों की पहचान करने में जुटी है, जिनका इस्तेमाल भूपेश अरोड़ा ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया। मामले की जांच जारी है. 

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