ऋषि कपूर लोकप्रिय फ़िल्म अभिनेता थे.उन्होंने बतौर बाल कलाकार फिल्मों में डेब्यू किया था और बतौर हीरो उन्होंने सुपरहिट फिल्म बॉबी  से डेब्यू किया था. उन्हें 1974 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार और 2008 में फ़िल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. मेरा नाम जोकर में बाल कलाकार के रूप में शानदार भूमिका के लिए 1970 में राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार दिया गया था. सुपरस्टार ऋषि कपूर अपनी बेहतरीन एक्टिंग ही नहीं अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं.

एक्टर ने अपनी किताब ‘खुल्लम खुल्ला’ में अपने और अपनी फैमिली के बारे में कई खुलासे किए, जिसने लोगों के होश उड़ा दिए. किताब में उन्होंने अपने पिता के अभिनेत्री नरगिस संग अफेयर के बारे में लिखा था. वहीं अपने पिता  और एक्ट्रेस वैजयंतीमाला के रिश्ते को लेकर भी चौकाने वाले खुलासे किए थे. अपनी किताब में उन्होंने लिखा था कि उनके पिता राज कपूर के नरगिस के साथ संबंध थे. दोनों के संबंधों के बारे में परिवार को पता था और इसके बाद भी घर में कुछ नहीं बदला. उनकी मां को औऱ परिवार को सब पता था, लेकिन उनकी मां ने नरगिस और राजकपूर के संबंधों पर कभी आपत्ति नहीं की. हालांकि वैजयंतीमाला की बात आई तो उनकी मां कृष्णा राज कपूर ने विरोध करना शुरू कर दिया.

 ऋषि कपूर ने लिखा था कि तब मैं बहुत छोटा था. जब मेरे पिता का नरगिस जी के साथ अफेयर था. इसलिए मैं उनके रिश्ते से प्रभावित नहीं हुआ. मुझे याद नहीं है कि घर में इस कारण से कुछ हुआ हो लेकिन मुझे याद है कि जब पापा वैजयंतीमाला से जुड़े थे  तो मेरी मां ने विरोध किया और हम मरीन ड्राइव के नटराज होटल में रहे. और वहां से हम दो महीने के लिए चित्रकूट रहने चले गए. मेरी मां ने तब तक हार नहीं मानी. जब तक कि उसने अपने जीवन के उस अध्याय को समाप्त नहीं कर दिया.ऋषि कपूर के इस खुलासे से लोग हैरान रह गए थे. हालांकि  बाद में वैजयंतीमाला ने इस अफेयर को फिल्म प्रमोशन के लिए एक चाल बताया था. 

ऋषि ने लिखा था कि कुछ साल पहले प्रकाशित एक इंटरव्यू में वैजयंतीमाला ने मेरे पिता के साथ कभी संबंध होने से इनकार किया. उन्होंने दावा किया पब्लिसिटी के लिए ऐसा किया गया. मेरे पिता अब सच्चाई बयां करने के लिए मौजूद नहीं हैं.मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अगर पापा जीवित होते. तो वह वैजयंती माला के साथ अफेयर को इतने खुले तौर पर नकारते नहीं. तो वह बेनकाब हो जातीं. वह प्रचार के लिए भूखे नहीं थे. मेरे पिता अपना ज्यादातर समय अपनी शर्तों पर जीते थे. बता दें कि राज कपूर और वैजयंतीमाला ने 60 के दशक में नजराना और संगम जैसी फिल्मों में साथ काम किया था. नजराना का निर्देशन सीवी श्रीधर ने किया था. वहीं संगम का निर्देशन और निर्माण राज कपूर ने किया था. फिल्म में राजेंद्र कुमार भी थे.

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