अफ़गान , इराक , यूक्रेन की लड़ाई में रहा प्राइवेट मिलिट्री का शानदार प्रदर्शन।
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के परिप्रेक्ष्य में, पाकिस्तान द्वारा निजी सैन्य ठेकेदारों (Private Military Contractors – PMCs) की संभावित तैनाती की खबरें सामने आ रही हैं। इन ठेकेदारों में पूर्व अमेरिकी नेवी सील्स और अन्य देशों के सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी शामिल हो सकते हैं, जो उच्च पारिश्रमिक पर काम करते हैं।
निजी सैन्य ठेकेदारों की भूमिका
निजी सैन्य कंपनियाँ, जैसे कि ब्लैकवॉटर (अब एकेडेमी), अतीत में इराक, अफगानिस्तान और यूक्रेन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय रही हैं। इनकी भूमिका में सुरक्षा प्रदान करना, प्रशिक्षण देना और कभी-कभी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई करना शामिल होता है। हालांकि, इनकी तैनाती को लेकर अक्सर नैतिक और कानूनी चिंताएँ उठती रही हैं।
पाकिस्तान की रणनीति
पाकिस्तान ने पहले भी सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय गाइड्स और भाड़े के सैनिकों को तैनात किया है। 2013 में, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने रिपोर्ट किया था कि पाकिस्तान सेना ने भारतीय सैनिकों के खिलाफ हमलों के लिए स्थानीय भाड़े के सैनिकों को नकद पुरस्कार देने की योजना बनाई थी । इस तरह की रणनीतियाँ पारंपरिक युद्ध के नियमों से हटकर होती हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का विषय बनती हैं।
क्षेत्रीय संतुलन पर प्रभाव
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग, जैसे कि उन्नत सैन्य तकनीक का हस्तांतरण, पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय रहा है । ऐसे में, पाकिस्तान द्वारा निजी सैन्य ठेकेदारों की तैनाती क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को और अस्थिर कर सकती है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान द्वारा निजी सैन्य ठेकेदारों की संभावित तैनाती न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और नैतिकता के दृष्टिकोण से भी चिंताजनक है। ऐसे कदमों से पारंपरिक सैन्य संघर्ष की सीमाएँ धुंधली होती हैं और अस्थिरता बढ़ सकती है।
