ब्यूरो चीफ अनमोल पचौरी -19-03-2022 21:53

भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल का पूरी दुनिया में खौफ है , किसी भी देश के पास इसका जवाब नहीं है ऐसे में भारत के लिए ये मिसाइल टेक्नोलॉजी बेहद ख़ास हो जाती है .

जब से पाकिस्तान में भारतीय मिसाइल गिरी है तब से पाकिस्तान मे खलबली मची हुई है. पाकिस्तान इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाना चाहता है. जिसके लिए वह इस मिसाइल वाले हादसे को यूनाइटेड नेशंस में भी उठा चुका है. वहीं भारत ने  यह साफ कर दिया कि यह मिसाइल मेंटेनेंस के दौरान अचानक चल गई थी, यह मिसाइल गिरी तो पाकिस्तान में थी लेकिन धमाका चीन में हुआ था. यानी चाइनीस एयर डिफेंस सिस्टम जो पाकिस्तान इस्तेमाल करता है वह इस मिसाइल को पकड़ नहीं पाए, जिसकी वजह से चीन की डिफेंस इंडस्ट्री में काफी किरकिरी हुई.

लेकिन यह कोई साधारण घटना नहीं है, भारत के लोग इस बात से बेखबर है कि भारत की दशको की मेहनत कुछ ही क्षण में बर्बाद हो सकती थी या यूं कहें कि भारत की सबसे संवेदनशील मिसाइल टेक्नोलॉजी जो पूरी दुनिया में किसी के पास नहीं है वह चीन के हाथों पढ़ सकती थी.चीन में इस मिसाइल का अच्छा ख़ासा खौफ है क्योंकि चीन के पास न ही इतनी तेज़ कोई मिसाइल है न ही ऐसा कोई रडार जो इसे पकड़ पाए .
मिसाइल में 350 किलो का वारहेड नहीं था अर्थात मिसाइल गिर के विस्फोट नहीं कर सकती थी, ऐसे में बिना वॉर हेड की मिसाइल यदि दुश्मन इलाके में गिर जाए और पूरी तरीके से नष्ट ना हो तो उस मिसाइल की टेक्नोलॉजी दुश्मन रिवर्स इंजीनियरिंग करके चुरा लेता है और ठीक वैसा ही हथियार अपने देश में विकसित कर लेता है और चीन इस काम में माहिर है!

चीन ने कई अमेरिकी मिसाइलों की टेक्नोलॉजी चुराई है और उनको अपने देश में सस्ता बनाकर छोटे-छोटे देशों को बेचा है. ऐसे में यदि ब्रह्मोस मिसाइल की टेक्नोलॉजी चीन के पास आ जाती तो स्थिति भविष्य में काफी गंभीर हो जाती.
फिलहाल इसमें राहत की बात यह है की मिसाइल गिरने की जगह से जो तस्वीरें सामने आई उससे यह प्रतीत होता है की मिसाइल अपनी सुपर सोनिक  स्पीड के चलते पूरी  तरह नष्ट हो गई होगी. और भारतीय इंटेलिजेंस ने भी इस बात को पुख्ता किया होगा की मिसाइल का सीकर और इंजन नष्ट हुए की नही , क्योंकि मिसाइल की स्पीड लगभग 3000 किलोमीटर प्रति घंटा के आसपास रही होगी जिससे उसके सीकर और इंजन गिरते ही नष्ट हो गए होंगे. जैसा की सरकार बोल रही है की यह एक हादसा था तो यह भारतीय आर्म्ड फोर्सेस के लिए एक सीख भी है और पाकिस्तान के लिए एक सबक भी.

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