UP/AGENCY:-तमिलनाडु से बिहार लौटे मजदूरों की पिटाई की शिकायत आने के बाद बवाल मचा हुआ है।शनिवार को चार लोगों की टीम जांच करने के लिए तमिलनाडु रवाना भी हो गई है, 170 किलोमीटर दूर जमुई के सिकंदरा ब्लॉक पहुंची। बिहार का यही वो जिला है, जहां सबसे ज्यादा लोग तमिलनाडु से भागकर आए हैं।

 सिकंदरा के वार्ड नंबर-12 स्थित कृष्ण रविदास के घर पहुंचे। इनके 18 वर्षीय बेटे मोनू की संदिग्ध हालत में 8 दिन पहले तमिलनाडु में मौत हो गई। वह किराए के कमरे में रहता था। उसी कमरे में उसका शव लटका मिला था। इनके भाइयों का आरोप है कि उसे मार कर टांग दिया गया।

घर के बाहर बैठी मां सोमा देवी बदहवास हैं। वे वहां पहुंचने वाले सभी लोगों से अपने बेटे को जिंदा करने की गुहार लगा रही है। उन्होंने कहा कि उनका जवान बेटा चला गया। एक बेटा सदमे में है और दूसरा बेटा वहां क्रिया-कर्म कर रहा है। किसको दोष दूं।

कई बार सवाल किए, लेकिन इससे ज्यादा उन्होंने कुछ नहीं बताया। इसकी वजह यह सामने आई कि एक बेटा तमिलनाडु में ही है, ऐसे में उन्हें डर है कि बयान दिया तो उसके साथ भी कोई अनहोनी हो सकती है।

आंखों के सामने बिहारियों को पिटते देखा, मदद तक नहीं कर पाया
इसके बाद हम सिकंदरा से 12 किलोमीटर दूर धधौर गांव पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात नीतीश पासवान और बिक्कू से हुई। वे भी सहमे हुए थे। एक दिन पहले ही वो भागकर यहां पहुंचे हैं।

पिछले 8 सालों से तमिलनाडु के तिरुपुर में एक कपड़ा फैक्ट्री की गाड़ी चलाने वाले नीतीश कहते हैं, ‘हमने अपनी आंखों से बिहारी भाइयों को सड़क पर पिटते देखा, लेकिन मदद तक नहीं कर पाए। मदद करता तो मैं भी मारा जाता। हिन्दी बोलता देख लोग पीटने लगते थे। वहां की महिलाएं भी हम लोगों को आकर धमका रही थीं।

स्थानीय लोग रोज आकर उन्हें तमिलनाडु छोड़कर जाने के लिए कह रहे थे। यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारी भी उनके इलाके में आकर कहते थे कि स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है, वे लोग चले जाएं नहीं तो वे उनकी कोई मदद नहीं कर पाएंगे।

पंकज ने बताया कि सबसे ज्यादा हिंसा तिरुपुर इलाके में हो रही है। वहां के स्थानीय लोग कह रहे हैं कि हम लोगों के कारण उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

तमिलनाडु से लौटे लगभग 50 से ज्यादा लोगों से बात की। सभी ने विवाद का एकमात्र कारण रोजगार को बताया। दरअसल, बिहारी मजदूर 600-800 रुपए में 10-12 घंटे काम करते हैं। जबकि स्थानीय मजदूर 1000-1200 रुपए में 6-8 घंटे ही काम करना चाहते हैं। तमिलनाडु के श्रमिक बिहारियों से भी ऐसा करने के लिए कहते हैं।

बिहारी मजदूरों के विरोध में तमिलनाडु में महिला-पुरुष लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। वे सरकार से रोजगार की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बिहारियों के कारण तमिल लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है। महीनों से चल रहा इनका आंदोलन अब हिंसक हो गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *