एक अध्ययन में दावा किया गया है कि मॉडिफाई स्टेम सेल्स स्ट्रोक सर्वाइवर्स की रिकवरी में मदद कर सकते हैं. स्ट्रोक के सबसे आम प्रकार को इस्केमिक स्ट्रोक कहा जाता है. इसमें जीवित बचे लोगों में से केवल 5 प्रतिशत ही पूरी तरह से ठीक हो पाते हैं. स्ट्रोक के मरीज आमतौर पर कमजोरी, पुराने दर्द, मिर्गी और अन्य कई समस्याओं से लंबे समय तक पीड़ित रहते हैं.

ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने शोध के आधार पर बताया कि स्टेम सेल से प्राप्त सेल थेरेपी स्ट्रोक के बाद मस्तिष्क की गतिविधि के सामान्य पैटर्न को बहाल करने में सक्षम है. अधिकांश उपचार स्ट्रोक के तुरंत बाद दिए जाएं तब ही प्रभावी होते हैं. चूहों पर ये प्रयोग किया गया और इस शोध का नतीजा एक महीने बाद बेहतर ढंग से सामने आया. मॉलेक्यूलर थेरेपी पत्रिका में प्रकाशित शोध पत्र के मुताबिक मस्तिष्क की गतिविधि पर स्टेम सेल प्रभाव को लेकर किया गया ये पहला शोध है. निष्कर्ष बताते हैं कि स्टेम सेल थेरेपी से सुधार संभव है.

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नए अध्ययन में टीम ने चूहों में नई स्टेम सेल थेरेपी का परीक्षण किया. स्ट्रोक और ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी के इलाज के लिए यह थेरेपी एक दशक से अधिक समय से क्लिनिकल ट्रायल पर है. क्लिनिकल ट्रायल से पहले ही संकेत मिले कि स्टेम सेल कुछ रोगियों को अपने हाथों और पैरों पर नियंत्रण पाने में मदद कर सकते हैं.

जीन पाज के नेतृत्व वाली टीम ने स्ट्रोक से पीड़ित होने के एक महीने बाद चोट के स्थान के पास जानवरों के मस्तिष्क में संशोधित मानव स्टेम कोशिकाओं को इंजेक्ट किया. इसके लिए वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को मापा. इसमें व्यक्तिगत कोशिकाओं और अणुओं का भी विश्लेषण किया गया. इसके अलावा, उपचार ने प्रोटीन और कोशिकाओं की संख्या भी बढ़ाई जो मस्तिष्क के कार्य और मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण हैं.

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