उत्तराखंड में कॉर्बेट बाघ अभयारण्य से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह अखिल भारतीय स्तर पर एक समान नीति चाहते हैं. ⁠जहां तक बाघ अभयारण्यों के प्रबंधन का सवाल है, हम पूरे देश में एक समान नीति चाहते हैं. नीति में बाघ अभयारण्यों के अंदर वाहनों की आवाजाही के पहलू को भी शामिल किया जाना चाहिए.

जस्टिस गवई ने हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उस घटना पर स्वतः संज्ञान लिए जाने का उल्लेख किया, जिसमें पर्यटकों को ले जा रहे सफारी वाहनों ने नए साल की पूर्व संध्या पर महाराष्ट्र के उमरेड-पौनी-करहांडला अभयारण्य में एक बाघिन और उसके शावकों की आवाजाही में बाधा डाली थी. ⁠इस मामले में एमिकस क्यूरी के तौर पर अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ वकील के परमेश्वर ने कॉर्बेट बाघ अभयारण्य में अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई के संबंध में सीबीआई की जांच का हवाला दिया.

पीठ ने कहा कि उसने इस मामले में सीबीआई की रिपोर्ट देखी है. उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने पीठ को उन अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच की के बारे में जानकारी दी. वकील ने कहा कि 17 मामलों में विभागीय जांच पूरी हो चुकी है और कुछ में लंबित है.

जब राज्य के वकील ने सीबीआई जांच का हवाला दिया तो पीठ ने कहा कि आप सीबीआई से संबंधित नहीं हैं. कॉर्बेट बाघ अभयारण्य से संबंधित मामले की सुनवाई 19 मार्च के लिए स्थगित करते हुए पीठ ने कहा कि हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यदि 19 मार्च तक हमें पता चलता है कि आप कार्रवाई करने में गंभीर नहीं हैं तो आपके मुख्य सचिव को यहां बुलाया जाएगा.

पीठ ने यह भी जानना चाहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और उनमें से कितनों को दंडित किया गया है. राज्य के वकील ने कहा कि वह इस संबंध में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करेंगे. साथ ही पीठ ने सीबीआई को सुनवाई की अगली तारीख से पहले मामले में की गई आगे की जांच पर  रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है.

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