हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया कि इम्यूनो-ऑन्कोलॉजी (आईओ) दवाएं, यानी कैंसर की इम्यून चिकित्सा, अगले पांच वर्षों में चिकित्सा क्षेत्र में सबसे बड़ा इनोवेशन बन सकती हैं. यह रिपोर्ट ग्लोबलडाटा द्वारा जारी की गई है, जो 128 फार्मा उद्योग के पेशेवरों के सर्वे पर आधारित है. रिपोर्ट के अनुसार, इम्यूनोथेरेपी के क्षेत्र में प्रगति कैंसर के इलाज के तरीकों को पूरी तरह बदलने वाली है. इसमें चेकपॉइंट इनहिबिटर, सीएआर-टी सेल थेरेपी और कैंसर वैक्सीन जैसी नई तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

ग्लोबलडाटा के हेल्थकेयर डिवीजन के वरिष्ठ निदेशक उर्टे जैकीमाविसियुटे ने कहा कि यह उपचार “अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत” होंगे. वह मानते हैं कि कैंसर के इलाज में अधिक प्रभावी दवाओं की आवश्यकता है और इम्यूनो-ऑन्कोलॉजी इसमें मदद करेगा. जैकीमाविसियुटे के अनुसार, यह क्षेत्र लगातार आगे बढ़ेगा क्योंकि कई प्रकार के कैंसर में अभी भी प्रभावी उपचारों की कमी है.

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इसके अलावा, मोटापा-रोधी दवाएं भी एक प्रमुख नवाचार क्षेत्र मानी गई हैं. सर्वे में बताया गया कि मोटापा-रोधी दवाएं, जैसे जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट, फार्मा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन रही हैं. ये दवाएं वैश्विक स्वास्थ्य संकट के समाधान के रूप में उभर रही हैं और इसके बाजार में वृद्धि हो रही है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, 2022 में दुनिया भर में लगभग 2 करोड़ नए कैंसर के मामले सामने आए थे. इसमें करीब 97 लाख लोगों की मौतें हुई थीं. सर्वे में यह भी बताया गया कि फेफड़े, स्तन और कोलोरेक्टल कैंसर के सबसे अधिक मामले हैं और यही सबसे अधिक मौतों का कारण थे. यह आंकड़े 85 देशों और 36 कैंसर को कवर करने वाले डेटा पर आधारित हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हर 5 में से 1 व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी कैंसर होता है और 9 में से 1 पुरुष और 12 में से एक महिला इस बीमारी से मरते हैं.

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