क्रिसमस के त्योहार से पहले पहाड़ों पर भारी बर्फबारी (Snowfall) हुई है. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में स्नोफॉल का जहां एक तरफ पर्यटक आनंद उठा रहे हैं वहीं आम लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा है. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सोमवार को हुई भारी बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. जिले में मुख्य रूप से ग्रामीण और ऊंचाई वाले इलाकों में 112 सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं.अधिकारियों ने बताया कि उन्हें सोमवार को शाम छह बजे तक, कोटखाई में 48, रोहड़ू में 27 और रामपुर, जुब्बल और डोडरा क्वार समेत कई सड़कों के अवरुद्ध होने की सूचना मिली.

भारी बर्फबारी के कारण सोलंग और अटल टनल रोहतांग के बीच करीब 1000 वाहन फंस गए, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। पुलिस की टीम ट्रैफिक जाम को हटाने में जुटी हुई है. 

हिमाचल प्रदेश के मनाली में बर्फबारी हुई है जिससे पर्यटकों में काफी खुशी देखने को मिल रही है. 

दिसंबर के अंतिम हफ्ते में  उत्तराखंड के पहाड़ों पर हुई बर्फबारी ने सैलानियों ,किसानों और कारोबारियों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है. हालांकि पारा गिरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक बारिश और बर्फबारी के सिलसिला साल के अंतिम दिनों में भी जारी रहेगा. चमोली के नीति घाटी में बर्फ का झरना बन गया है. नदी भी धीरे-धीरे हिमानी चादर में बदल जा रही ह.। चकराता के लोखंडी में भी सफेदी का दमकता जादू है और सैलानी बर्फ का मजा ले रहे हैं.

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पहाड़ों पर बर्फबारी क्यों होता है? 
पहाड़ों पर बर्फबारी होने का मुख्य कारण तापमान में कमी को माना जाता है. जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, वातावरण का तापमान घटता जाता है. इसे “लैप्स रेट” (Lapse Rate) कहते हैं, जिसमें हर 1,000 मीटर ऊंचाई बढ़ने पर तापमान लगभग 6.5 डिग्री सेल्सियस कम हो जाता है.पहाड़ों की ऊंचाई अधिक होने के कारण वहां का तापमान बहुत कम रहता है, जो पानी को जमाकर बर्फ में बदलने के लिए आदर्श स्थिति बनाता है.सर्दियों में पहाड़ों का तापमान और भी गिर जाता है, जिससे बर्फबारी की संभावना बढ़ जाती है. हिमालय और अन्य ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में वायुमंडल का दबाव कम होता है, और ठंडी जलवायु होने की वजह से वहां बर्फबारी आमतौर पर देखी जाती है. 

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