हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में गुरु दत्त और वहीदा रहमान की जोड़ी और उनकी प्रेम कहानी की चर्चा आज भी होती है। सोशल मीडिया पर अक्सर उनके रिश्ते को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं, जिनमें से एक बड़ा दावा यह भी है कि गुरु दत्त वहीदा से शादी करने के लिए इस्लाम अपनाने वाले थे। हालांकि, उनके करीबी रहे लेखक अबरार अल्वी के हवाले से दर्ज किस्से इस कहानी का एक अलग ही पहलू सामने लाते हैं।

फिल्म ‘CID’ से शुरू हुई थी नजदीकियां
गुरु दत्त और वहीदा रहमान की पहली मुलाकात फिल्म ‘CID’ के दौरान हुई थी। उस समय गुरु दत्त ने वहीदा के साथ नौ साल का करार किया था और उनकी प्रतिभा पर पूरा भरोसा रखते हुए उन्हें अभिनय की बारीकियां सिखाई थीं। साथ काम करते हुए दोनों ने काफी समय साथ बिताना शुरू किया, जिसके चलते फिल्म यूनिट के बीच उनकी नजदीकियों को लेकर चर्चाएं होने लगी थीं।
क्या धर्म बदलने की बात सच थी?
गुरु दत्त और वहीदा के रिश्ते को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जाता है कि क्या अभिनेता वहीदा से शादी के लिए इस्लाम कबूल करने वाले थे। किताबों और अबरार अल्वी के अनुभवों के अनुसार, यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहीदा रहमान की बहन के पति रऊफ ने यह अफवाह फैलाई थी कि गुरु दत्त धर्म परिवर्तन करने जा रहे हैं, ताकि वे अपनी पहली पत्नी गीता दत्त के होते हुए दूसरी शादी का रास्ता खोल सकें।

कहा जाता है कि रऊफ एक काजी को लेकर गुरु दत्त के घर भी पहुंच गए थे, लेकिन वहां मौजूद अबरार अल्वी, जॉनी वॉकर और अन्य साथियों ने गुरु दत्त को उनके सामने आने से बचा लिया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि धर्म बदलने की बात वहीदा की कोई शर्त नहीं थी, बल्कि इसे एक अफवाह के तौर पर फैलाया गया था।
क्यों आ गई दोनों के बीच दूरियां?
समय के साथ गुरु दत्त ने अपनी पत्नी गीता दत्त के साथ अपने रिश्ते को सुधारने का निर्णय लिया और वहीदा से दूरी बनानी शुरू कर दी। उन्होंने वहीदा का मेकअप रूम वापस ले लिया और बातचीत भी कम कर दी। बाद में ‘साहिब बीबी और गुलाम’ की शूटिंग के दौरान भी वहीदा ने कुछ शर्तों के साथ काम किया था, जिसके बाद इस मशहूर जोड़ी ने कभी दोबारा साथ काम नहीं किया। इन तमाम बातों का जिक्र सत्य सरन की किताब ‘Ten Years with Guru Dutt’ और ‘Guru Dutt: An Unfinished Story’ में मिलता है।
