बिहार में एनडीए की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विपक्ष ने समय रहते अपनी राजनीति नहीं सुधारी, तो आने वाले दिनों में उनकी कुर्सी भी नहीं बचेगी। इस दौरान चुनावी नतीजों और एसआईआर (SIR) को लेकर दोनों पक्षों के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

लोकतंत्र की रक्षा को बताया भाजपा का पहला कर्तव्य
भागलपुर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने विपक्ष के रवैये पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष चुनाव जीतता है, तो उसे लोकतंत्र की जीत बताया जाता है, लेकिन हार मिलने पर चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र पर ही खतरे का दावा किया जाने लगता है। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जीत के बाद सब कुछ सही माना गया, जबकि बिहार में हार के बाद वोट चोरी के आरोप लगाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उठ रहे सवालों के खिलाफ जनता के बीच जाना और लोकतंत्र को बचाना पार्टी का मुख्य कर्तव्य है।
संजय सरावगी और अन्य नेताओं के तीखे हमले
कार्यक्रम के दौरान बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी विपक्षी दलों के गठबंधन पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने विपक्षी गठबंधन को आड़े हाथों लेते हुए राहुल गांधी के बयानों और एसआईआर के मुद्दों पर आपत्ति जताई। सरावगी ने चुनौती दी कि कोई भी एक मतदाता सामने आकर यह साबित करे कि इस बार उसका नाम सूची से काटा गया हो।
भागलपुर समेत कई जिलों में रैलियों का आयोजन
भागलपुर के लाजपत पार्क में जनसभा के बाद एक पदयात्रा का भी आयोजन किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेताओं का स्वागत किया। इस पदयात्रा के माध्यम से भाजपा और उसके सहयोगी दल एसआईआर और चुनावी प्रक्रिया पर चल रही राजनीतिक बहस के बीच अपना पक्ष जनता तक पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में भी रैलियां निकाली गईं, जहां केंद्रीय नेताओं ने विपक्ष पर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
