वर्ष 2026 में देव दिवाली का पावन पर्व 24 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर बिहार और झारखंड के विभिन्न शहरों में श्रद्धालु नदियों, तालाबों और मंदिरों के किनारे शाम के समय दीपदान करेंगे।

देव दिवाली और कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाने की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी-देवता धरती पर आकर दीप जलाकर उत्सव मनाते हैं, जिस वजह से इसे देवताओं की दिवाली कहा जाता है। इस अवसर पर गंगा स्नान, भगवान शिव की पूजा और दीपदान करने का विधान है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर 2026 की रात 11:42 बजे से शुरू होकर 24 नवंबर की रात 8:23 बजे तक रहेगी।
बिहार के प्रमुख शहरों में दीपदान का समय
बिहार के अलग-अलग जिलों में पंचांग गणना के अनुसार दीपदान के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है:
- पटना: शाम 4:59 से 7:38 बजे तक
- गया: शाम 5:01 से 7:39 बजे तक
- मुजफ्फरपुर: शाम 4:57 से 7:36 बजे तक
- भागलपुर: शाम 4:52 से 7:31 बजे तक
- दरभंगा: शाम 4:55 से 7:34 बजे तक
झारखंड में दीपदान का शुभ मुहूर्त
झारखंड की राजधानी रांची में 24 नवंबर को शाम 5:02 से 7:39 बजे तक दीपदान करने का समय तय किया गया है। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं और दीप प्रज्वलित कर सकते हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार राज्य के अन्य शहरों के समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है।
इस दिन क्या करें?
देव दिवाली के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। शाम के समय घर और मंदिरों में दीये जलाएं तथा किसी पवित्र नदी या तालाब के किनारे दीपदान करें। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और अन्य चीजों का दान करना भी शुभ माना जाता है।
