पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी की शाम हुई भीषण भगदड़ के बाद सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। इस हादसे के बाद भीड़ पर प्रभावी नियंत्रण रखने और स्थिति को संभालने के लिए पुराने अनुभव वाले 9 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से मैदान में उतार दिया गया है। इसके साथ ही कोलकाता पुलिस ने आगामी दिनों के लिए एक सख्त सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।

तैनाथ किए गए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने का लंबा अनुभव रखने वाले नौ प्रमुख पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा की कमान सौंपी गई है। इनमें सुमनजीत राय (आईजी, बॉर्डर), महमूद अख्तर (आईजी, आईबी), मिराज खालिद (आईजी, ट्रैफिक), रूपेश कुमार (डीआईजी, एसटीएफ), शुभंकर भट्टाचार्य (डीआईजी, ट्रैफिक), तरुण हल्दर (डीआईजी, सीआईडी), सौम्य राय (एसएस, ईबी), प्रियब्रत राय (एसपी, ट्रैफिक) और दीपक सरकार (एसएस, सीआईडी) शामिल हैं।
कोलकाता पुलिस की नई सुरक्षा गाइडलाइन
भविष्य में इस तरह की किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए पुलिस प्रशासन ने पुलिसकर्मियों और पूजा समितियों के वास्ते विशेष नियम और दिशानिर्देश लागू किए हैं:
- बारिश के दौरान नो-एंट्री: मूसलाधार बारिश शुरू होते ही पंडालों के मुख्य प्रवेश द्वार तुरंत बंद कर दिए जाएंगे ताकि अंदर मौजूद लोग सुरक्षित बाहर निकल सकें।
- ड्यूटी स्थल न छोड़ने का आदेश: विपरीत मौसम या किसी भी कठिन परिस्थिति में कोई भी पुलिसकर्मी अपनी निर्धारित तैनाती की जगह नहीं छोड़ेगा।
- वीआईपी वाहनों पर सख्ती: किसी भी वीआईपी वाहन को सीधे पंडाल के प्रवेश द्वार तक जाने की अनुमति नहीं होगी, इन्हें तय दूरी पर ही पार्क करना होगा।
- मार्गों में बदलाव पर रोक: पूजा आयोजकों द्वारा प्रवेश और निकास मार्गों के पैटर्न में अचानक कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
- वॉलेंटियर्स से समन्वय: प्रत्येक पुलिस अधिकारी को पूजा समिति के पांच से छह स्वयंसेवकों के साथ लगातार संपर्क में रहना होगा।
- आपातकालीन उपकरण: प्रत्येक पुलिस दल के पास भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त रस्सियां, बैरिकेडिंग रेलिंग और छोटे लाउडस्पीकर होना अनिवार्य किया गया है।
