बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। चुनावों में अपनी जीत सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार करने में जुटे एनडीए (NDA) के सामने इस वक्त अपनों से ही निपटने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। गठबंधन के भीतर उभरते मतभेदों और बगावती तेवरों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित शीर्ष नेताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके चलते लगातार बैठकों का दौर जारी है।

बैठकों में बगावत और एकजुटता पर मंथन
हाल ही में हुई बैठकों के दौरान मुख्य रूप से मोकामा विधायक अनंत सिंह के बागी तेवर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के भीतर चल रही कलह और सहयोगी दलों के नेताओं की नाराजगी जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई। बैठकों में यह जोर दिया जा रहा है कि चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर एकजुटता का संदेश दिया जाए। हालांकि, अनंत सिंह के मामले पर कोई पूरी सहमति नहीं बन पाई है, और जदयू नेताओं का कहना है कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह इस पूरे प्रकरण को संभाल रहे हैं।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के मुकाबले को लेकर स्थिति काफी चर्चा में है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने जदयू प्रत्याशी के खिलाफ जाकर जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह को समर्थन देने की घोषणा की है। पिछले चुनावों में नीरज कुमार को अच्छे-खासे वोट मिले थे, लेकिन इस बार जन सुराज की मौजूदगी और अनंत सिंह के समर्थन के कारण चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।
सारण शिक्षक निर्वाचन सीट पर भी चुनौती
केवल पटना ही नहीं, बल्कि सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी एनडीए के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। यहां जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर के खिलाफ सहयोगी दल आरएलएम (RLM) ने अपने दल के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा को मैदान में उतार दिया है। आरएलएम के कुछ विधायकों द्वारा इस उम्मीदवार को समर्थन देने की चर्चा है, जिससे वोटों के बंटवारे की आशंका जताई जा रही है। इन तमाम आंतरिक गतिरोधों के बीच एनडीए के लिए विधान परिषद की इन सीटों पर अपनी रणनीति को सफल बनाना एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।
