झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC CGL) की परीक्षा में हुए बड़े फर्जीवाड़े की सीआईडी जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच से पता चला है कि प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी के एक कर्मचारी ने परीक्षा से पहले ही सभी सवाल और उनके जवाब कंठस्थ कर लिए थे। इस अंदरूनी पहुंच के कारण ही पूरे मामले में पेपर लीक का रास्ता साफ हुआ।

मुद्रण एजेंसी के कर्मचारी की थी संदिग्ध भूमिका
मानेसर स्थित आईसीएन इंडिया नामक एजेंसी को परीक्षा के लिए प्रश्नों की डिजाइनिंग, छपाई और ओएमआर शीट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी एजेंसी में समीर कुमार नामक कर्मचारी कार्यरत था, जिसके पास प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ी सीधी पहुंच थी। जांच में यह बात सामने आई है कि समीर ने परीक्षा से पहले ही सभी प्रश्नों और उत्तरों को पूरी तरह याद कर लिया था और वह इस गिरोह का एक अहम हिस्सा बन गया था।
कोचिंग संस्थानों की भूमिका और वित्तीय लेन-देन की जांच
सीआईडी इस बात की भी गहराई से छानबीन कर रही है कि पेपर लीक से जुड़ा पैसा कहां और कैसे इस्तेमाल किया गया। इस सिलसिले में रांची के दो प्रमुख कोचिंग संस्थान, पतंजलि आईएएस एकेडमी और शिवांगन की पाठशाला, जांच के दायरे में हैं। इन संस्थानों के संचालक पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा, समीर के बैंक खातों की वित्तीय पड़ताल में यूपीआई के जरिए हुए संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। सीआईडी अब इन सभी कड़ियों को जोड़कर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है।
