दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का निधन हो गया है। बुधवार को उन्होंने रांची के हिल व्यू अस्पताल में अंतिम सांस ली, जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर है। उनके जीवन का यह सफर असाधारण संघर्षों और बहादुरी की अनकही कहानियों से भरा हुआ था।

शादी के तुरंत बाद शुरू हो गया था कड़ा संघर्ष
झारखंड आंदोलन के दौरान जब शिबू सोरेन जंगलों और पहाड़ों में छिपकर रहते थे, तब रूपी सोरेन ने अकेले ही परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभाली। शादी के कुछ ही दिनों बाद शिबू सोरेन को पुलिस ने गिरफ्तार कर हजारीबाग जेल भेज दिया था। उस वक्त नई-नयी शादी के बाद वह पूरी तरह अकेली पड़ गई थीं और उनके पास पति को रिहा कराने के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं थे।
पिता से मदद मांगकर पति को जेल से छुड़ाया
मुश्किल वक्त में उन्होंने गांव के एक व्यक्ति से मदद मांगकर मायके चांडिल तक का सफर तय किया। वहां पहुंचकर उन्होंने अपने पिता से आग्रह किया और उनकी मदद से पैसे लेकर आईं, जिससे शिबू सोरेन को जेल से रिहा करवाया जा सका। इसके बाद भी पुलिस और महाजनों का सामना उन्हें अकेले ही करना पड़ा।
जब बेटे को गोद लेकर जंगलों की खाक छानी
लगभग 1970 के आसपास पुलिस अक्सर उनके घर आकर पूछताछ करती थी, लेकिन एक वक्त के बाद उन्होंने पुलिस के सवालों के जवाब देने से साफ इनकार कर दिया था। आंदोलन के दिनों में जब शिबू सोरेन की कोई खोज-खबर नहीं मिलती थी, तब वह अपने बेटे दुर्गा को गोद में लेकर अपनी सास और ननद के साथ जंगलों और पहाड़ों में पति की तलाश करने निकल पड़ी थीं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी और लगातार पुलिस की नजरों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
