कन्या दान को पुण्य कार्य इसलिए माना जाता है क्योंकि पिता से लगाव होता है. यानी इसमें पिता स्नेह का त्याग करता है. इसका बाल विवाह से कहीं लेना-देना नहीं है. हालांकि अभी भी कुछ जगहों पर बाल विवाह की कुप्रथाएं हैं. बाल विवाह अभिशाप है.

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