रूस में ईरानी ड्रोन के उत्पादन के लिए संयंत्र लगाया जा रहा है.
रूस और ईरान के बीच रक्षा संबंधों पर अमेरिका चिंतित है.
माना जा रहा है कि इसका असर यूक्रेन पर ही नहीं ईरान के आसपास भी होगा.
AMERICA दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति (USA as superpower) है, लेकिन पिछले कुछ सालों से उसकी स्थिति को चुनौतियां मिल रही हैं. आज दुनिया के किसी भी कोने में कुछ भी घटित होता है तो वह अमेरिका के लिए अहम होती है क्योंकि उसे यह तौलना होता है कि वह घटना उसके हितों के खिलाफ तो नहीं है. हाल में अमेरिका की गहरी नजरें रूस, ईरान, उत्तर कोरिया, चीन सहित कई देशों पर है. हाल ही में ईरान और रूस (Russia and Iran) ने समझौता किया है जिसके तहत ईरानी तकनीक वाले ड्रोन अब मॉस्को में भी निर्मित होंगे.अमेरिकी मीडिया ने इस खबर को रूस यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine war) के लिहाज से बहुत महत्व दिया है.
अकेला नहीं यूक्रेन
रूस यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन के पीछे अमेरिका की अगुआई में नाटो खड़ा है जिसमें यूरोप के अधिकांश देश शामिल हैं. पिछले कुछ सालों से रूस यूक्रेन की नाटो सदस्यता पाने की कोशिशों पर सख्त ऐतराज कर रहा था. और इसी का नतीजा रूस यूक्रेन युद्ध है. अभी यूरोप सहित पश्चिमी देश यूक्रेन का साथ देकर युद्ध संतुलन लाने का काम कर रहे हैं.
ईरानी ड्रोन का असर
यही वजह है कि युद्ध एक तरफा नहीं हुआ जो केवल यूक्रेन और रूस को ही देखकर लगता है. अब रूस को ईरानी कामीकाजे ड्रोन की क्षमता मिलने से माना जा रहा हैकि रूस की आक्रमण क्षमता इससे बहुत ही ज्यादा बढ़ जाएगी. अमेरिका के वॉल स्ट्रीट जर्नल का कहना है कि इस मॉस्को के पास प्रस्तावित फैक्ट्री में कम से कम 6 हजार ड्रोन बनाए जा सकते हैं.
नए इंजन का विकास
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पिछल महीने के ही शुरू में रूस की यात्रा की है जहां उन्होंने साइट देखने के साथ इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के विस्तार से चर्चा की. इस बारे में जानकारी रखने वाले अधिकारी का कहना है कि ईरान और रूस शाहीद-136 यूएवी के लिए नए इंजन का विकास करने में लगे हैं जिससे ड्रोन ज्यादा दूर तक और तेजी से भाग सकेंगे.