दुनिया की बढती आबादी के साथ विभिन्न देशो में अनाज संकट गहराता जा रहा है ऐसे में भारत से पूरी दुनिया उम्मीद करता है की भारत उनकी इस जरुरत को पूरा करें …लेकिन अत्यधिक निर्यात की वजह से भारत पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है ऐसे में सरकार ने गेहू समेत मैदा और सूजी के निर्यात पर भी रोक लगा दी .
4 वजहें जो देश में गेहूं की कमी की ओर इशारा करती हैं
भले ही भारत सरकार गेहूं की कमी को नकार रही हो, लेकिन 4 वजहों से पता चलता है कि देश में गेहूं की कमी होने वाली है। एक-एक कर इन सभी वजहों को जानते हैं….
पहली वजह: मई 2022 में केंद्र सरकार ने एक्सपोर्ट पॉलिसी में संशोधन करते हुए गेहूं के निर्यात को रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी (प्रतिबंधित श्रेणी) में कर दिया था।
दूसरी वजह: ब्लूमबर्ग रिपोर्ट ने दावा किया कि गेहूं की कमी और बढ़ती कीमतों के बीच सरकारी अधिकारी विदेशों से गेहूं खरीदने पर विचार कर रहे हैं।
तीसरी वजह: रिपोर्ट में कहा गया कि अधिकारी गेहूं के आयात को बढ़ावा देने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी में 40% कटौती की भी चर्चा कर रहे हैं।
चौथी वजह: 27 अगस्त को सरकार ने सिर्फ गेहूं ही नहीं आटा, मैदा और सूजी के एक्सपोर्ट पर भी रोक लगाने का फैसला लिया।
भारतीय किसान दुनिया का पेट भर रहा है। मिस्र ने भारत से गेहूं के इंपोर्ट को मंजूरी दी है। दुनिया की बढ़ती मांग को देखते हुए संभावना है कि वित्त वर्ष 2022-23 में गेहूं का निर्यात रिकॉर्ड 100 लाख टन पार कर जाएगा।’15 अप्रैल 2022 को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट के जरिए ये बात कही थी। तब भारत रिकॉर्ड स्तर पर विदेशों में गेहूं बेच रहा था, लेकिन 4 महीने बाद ही स्थिति इतनी बदल गई कि शनिवार को भारत सरकार ने गेहूं के अलावा आटा, मैदा और सूजी तक के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया।
भारत ने इस साल मार्च तक 70 लाख टन गेहूं दूसरे देशों में बेचा
2022 की शुरुआत में रूस और यूक्रेन के बीच जंग शुरू होने से सप्लाई चेन टूट गई। लिहाजा इंटरनेशनल मार्केट में गेहूं की डिमांड काफी तेजी से बढ़ गई। कई पड़ोसी देश भारत की ओर देखने लगे।दुनिया में बढ़ती कीमतों का फायदा उठाने के लिए भारत ने इस साल मार्च तक करीब 70 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट किया। जो पिछले साल की तुलना में 215% ज्यादा है। अप्रैल में भारत ने रिकॉर्ड 14 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट किया था, लेकिन मई में देश में गेहूं के संकट को देखते हुए भारत सरकार ने इसके एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया।
देश में 14 साल में सबसे निचले पायदान पर गेहूं स्टॉक
21 अगस्त 2022 को ‘लाइव मिंट’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि FCI के पास अगस्त महीने में पिछले 14 साल में गेहूं का स्टॉक सबसे कम था। इसकी वजह से इस साल के जुलाई महीने में आम लोगों के लिए गेहूं की कीमतों में 11.7% की बढ़ोतरी हुई थी।
वहीं, ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में गेहूं की कमी और दुनिया भर में बढ़ रही कीमतों के बीच अब अधिकारी विदेश से गेहूं लाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट के सामने आते ही भारत सरकार की ओर से सफाई दी गई थी।