बिहार में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक अजय कुमार ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सीएम यह दावा करते नहीं थकते कि उनके शासनकाल में भ्रष्टाचार बिल्कुल नहीं है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है.

अजय कुमार ने कहा कि विधानसभा में यह मुद्दा बाकायदा उठाया जा चुका है कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में 30-30 लाख रुपये लेकर सीओ की पोस्टिंग तक हो चुकी है. विधानसभा में विधायक यह मुद्दा उठाते रहते हैं कि जन्म, मृत्यु, आय और आवासीय प्रमाण पत्र सहित कोई भी सरकारी काम करवा लीजिए, कुछ भी पैसे लिए बिना नहीं हो रहा है, जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि हर विभाग में भ्रष्टाचार अब चरम पर पहुंच चुका है, लेकिन सुशासन बाबू को इन सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता.

उन्होंने कहा कि कई लोगों ने आरोप लगाए हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना में दलाल तीन से पांच हजार रुपये मांगते हैं. मैंने प्रशासन और शासन से जुड़े अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि अगर आपके अंदर इच्छाशक्ति हैं, तो निश्चित तौर पर इसे रोका जा सकता है. लेकिन अफसोस इस तरह की इच्छा शक्ति मौजूदा समय में किसी भी अधिकारी में देखने को नहीं मिल रही है, जिसका नतीजा है कि आज की तारीख में हर विभाग में भ्रष्टाचार है.

CPM नेता ने कहा कि बिहार की मौजूदा स्थिति को देखकर अब यह मान लिया जाए कि यहां नीतीश कुमार का इकबाल खत्म हो चुका है. उनकी बात कोई नहीं मानता है. अब ऐसे में गरीब जनता के पास कोई विकल्प नहीं है. अब वे करें तो क्या करें. प्रदर्शन-विरोध के सिवाय वह और क्या कर सकती है?

उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों की पिटाई करने वाले अपने बयान के संदर्भ में कहा कि भ्रष्टाचार के ऊपर डंडा चलाना गलत है क्या? अब कुछ एक हिस्से को वायरल किया जा रहा है, जबकि बाकी के हिस्से को हटा दिया गया है. कहा जा रहा है कि विधायक जी ने कहा कि पीठ फाड़ दो. इस तरह से बातें वायरल करना बिल्कुल गलत है. मैंने बहुत ही जिम्मेदारीपूर्वक कहा था कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ प्रदर्शन करो, प्रशासन से भी कहो, कार्रवाई करो, और अगर पिटाई करने की नौबत आए, तो जरूर पिटाई होनी चाहिए.

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